एक शिक्षक – 2020

एक शिक्षक – 2020

शिक्षकशिक्षक

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ! इससे पहले की हम भविष्य की बात करें , हमें यह समझ लेना चाहिए कि हमारा अतीत हमारा सबसे बड़ा शिक्षक होता है । मुझे आशा है की आने वाले इस वर्ष में आप गलतिया करेंगे । क्यों की अगर आप गलतियां करते है तो आप नई चीजें करने की कोशिश करते है । कुछ नया सिखने की , जीने की कोशिश करते है , अपने आप को बदलते हुए अपने विश्व को बदलते है । आप उन चीजों को करते है जिन्हे आपने पहले कभी नहीं किया है और अधिक महत्वपूर्ण बात यह है आप कुछ करते है ।
नील गैमन


एक और साल अपनी गति से सरकते हुए अपने अंत पर आ गया और एक नया साल बाहें फैलाकर स्वागत के लिए बाट जोह रहा है , ये नए – पुराने और उतार – चढ़ाव के दौर हम जन्म से ही देखते आ रहे हैं , और जब तक जीवित रहेंगे देखते ही रहेंगे । लेकिन बीते कुछ समय में हम सभी कुछ ऐसी चुनौतियों , हादसों , महामारियों और अत्यंत दुखद घटनाओं के साक्षी बनें जिन्होंने हमें हिलाकर रख दिया …

२०२० में वूहान से निकला कोविड – १९ , यह प्राणघातक संक्रमण लाखों लोगों की जान ले गया , इसने कई देशों की अर्थ व्यवस्था की कमर तोड़ दी , पुरे विश्व में अरबों लोग घरों में कैद हो गए । लॉक डाउन होने के कारण जहां करोड़ों बेरोजगार हो गए वहीँ मध्यम वर्ग का बड़ा हिस्सा आर्थिक तंगी के कारण गरीबी की ओर बढ़ गया ।


भारत में इन सभी के कारण कुछ ऐसी घटनाएं भी हुई जिसनें जनता को ग़मगीन किया । इसमें प्रमुख था भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प में २० जवानों का शहीद होना और कुछ चर्चित लोगों का सामान्य एवं असामान्य परिस्थितियों में निधन होना आदि । जैसे – शुशांत सिंह राजपूत , इरफ़ान खान , शास्त्रीय गायक पंडित जसराज , शायर राहत इंदौरी , प्रणव मुखर्जी , अहमद पटेल , राम विलास पासवान , अमर सिंह , बेजान दारुवाला , चेतन चौहान , एम ० डी ० एच ० कम्पनी के मालिक धर्मपाल सिंह गुलाटी आदि ।


हम सभी ने जिन उम्मीदों के साथ 2020 की शुरुवात की थी और नव वर्ष की शुभकामनाएं दी थी । वह उम्मीदें सिर्फ २ महीने बाद ही इस महामारी से बचने के संघर्ष में बदल गयी ।
महत्वपूर्ण बात यह है की चाहते हुए और ना चाहते हुए भी हम सभी नें जीवन के नए रंग एवं रूप देखे और कई मूल्यवान सबक सीखे । भले ही यह बीता दौर कितना भयानक और दर्दनाक क्यों न रहा हो लेकिन हम सभी के अनुभव आने वाली पीढ़ियों को एक सकारात्मक दिशा देंगें , और भविष्य में सावधान भी रखेंगें ।
महामारी तो शायद काबू में आ जाए या ख़त्म हो जाए , लेकिन क्या हम अपनी यादों में 2020 को सिर्फ कोरोना की वजह से ही याद रखना चाहेंगें या फिर इस वजह से की हम सभी के जीवन में वर्ष 2020 ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई , एक शिक्षक की भूमिका । जिसके कारण हमनें हार मानने की अपेक्षा जूझना और फिर लड़ना सीखा , और ये जाना की बुरा से बुरा समय भी हमें कुछ सीखाता है ।

आइये नजर डालते है की …

2020 ने हमें क्या सबक सिखाये …

वसुधैव कुटुम्बकम्

पूरा विश्व एक परिवार है ऐसा परिवार जो विभिन्न धर्मों से मिलकर बना है । इस महामारी नें धर्म देख कर वार नहीं किया , चाहे हिन्दू , मुस्लिम हो या सिख , ईसाई या फिर कोई और धर्म । कोरोना नामक विपत्ति ने किसी को नहीं बक्शा और ना ही भेदभाव किया । एक शिक्षक के रूप में 2020 ने बताया की अगर आप सजग , सुरक्षा को लेकर एकमत और आपदा का सामना करने के लिए संगठित नहीं है तो आप नष्ट हो जायेंगे , फिर कोई फर्क नहीं पड़ता आप किस जाती के है या किस धर्म के हैं … कोई भी मौलवी , पादरी या पुजारी किसी भी रोगी का नहीं बचा सकें ।

अपना स्वास्थ्य अपने हाथ


हममें से ज्यादातर लोगों की वर्षों से चली आ रही भागदौड़ भरी जिंदगी को अगर किसी ने विराम लगाया तो वर्ष २०२० ने ही लगाया । कुछ रुपये ज्यादा कमाने के लिए और अधिक से अधिक भौतिकता का भोगने के लालच में लगभग हम सभी अनियमित जीवन – शैली जी रहे थे { और कुछ नासमझ अभी भी जी रहे है } सोने , खाने , पीने और काम करने की यही अनियमितता हमारी रोग प्रतिरोधक छमता को प्रभावित करती है । जिसके परिणामस्वरूप अनेक रोग हमारे शरीर पर आक्रमण कर देते है । इस शिक्षक 2020 से हमनें यह सीखा की प्रकृति ने जन्म से ही हमारे अंदर इम्युनिटी नामक सॉफ्टवेयर इंस्टाल किया है जो अगर सही काम कर रहा है तो हमें किसी बाहरी डॉक्टर की जरूरत नहीं पड़ती । हमें बस उसे सही जीवन – शैली अपना कर दुरुस्त रखना होता है । हमारा अच्छा स्वास्थ्य हमारे हाथ में ही होता है ।

अनुशासन आवश्यक है


अनुशासन बंधन नहीं आजादी है । जिन लोगों ने इस तथ्य को समझा और सीखा वे जान पाए की अनुशाषित और नियमबद्ध तरीके से जीया गया जीवन आपको न सिर्फ रोग – मुक्त रखने में सहायता करता है , बल्कि कई अन्य मामलों जैसे – वित्त आदि जोखिम लेने से रोकता है ।
जिन लोगों ने कोरोना काल से पहले अनुशाषित होकर अपने स्वास्थय और अपनी जेब पर ध्यान दिया , वे इस परीक्षा की घडी में उत्तीर्ण हुए और दूसरों के लिए आदर्श भी बनें ।

संयम है तो जीवन है


असंयमितता से तात्पर्य है , उतावलेपन , जल्दबाजी करना । दूसरे शब्दों में कहें तो अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखने वाला व्यक्ति संयमित होता है । २०२० { कोरोना काल } संयम को समझने का सबसे अच्छा उदाहरण है ।
इंटरनेट पर टेलीविजन पर कोरोना के बढ़ते मरीज देखकर मनुष्य ने सीखा की संयम कितना आवश्यक है ।
देश के एक नासमझ वर्ग ने सरकार के आदेशों का उलंघन किया । और लॉकडाउन के बाद भी वे आवश्यक कार्यों के लिए बाहर गए , सिर्फ अपनी मूर्खता का प्रदर्शन करने के लिए की वे डरपोक नहीं हैं , जीभ के चटोरेपन ने भी उन्हें खूब उकसाया । और उनका यह रवैये की जो होगा देखा जाएगा , कई लोगों की अकाल मृत्यु का कारण बना । वहीँ इसके उलट करोड़ों संयमित लोगों ने न सावधानियां छोड़ी न छोड़ने दी । उन्होंने अपनी इच्छाओं पर , भोजन पर , इन्द्रिय सुख पर और व्यय पर नियंत्रण रख कर दूसरों को भी समझाया की घूमना – फिरना और मौज – मस्ती के लिए पूरा जीवन है । उन्होंने सफाई और दूरी बनायें रखने के साथ – साथ हर वक्त मास्क इत्यादि पहनने पर ध्यान दिया और करोड़ों लोगों के जीवन का बच पाना संभव हुआ ।

स्वाबलंबी बनें

अचानक लगे लॉकडाउन ने देश के हर व्यक्ति को वहीँ रोक दिया जहां वह था । दूसरे देशों और शहरों में रहने वाले सैकड़ों विद्यार्थी एवं कामकाजी लोग जो खाने और दूसरी अन्य जरूरतों के लिए किसी और पर आश्रित थे । व्यथित हो उठे , अनेक लोगों के लिए भोजन बनाना एवं साफ़ – सफाई करने जैसे काम पहाड़ जितने बड़े हो गए , ठीक इसके विपरीत जो अपना काम स्वयं करते थे एवं कर्मचारियों पर निर्भर नहीं रहते थे । उन्हें कोई विशेष परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा । फलस्वरूप शिक्षक 2020 एक बात सभी को सीखा पाए की जो स्वाबलंबी है वही सुखी है ।

प्रतिभा हम सभी में है


ठहराव   कभी – कभी  बेहद  खूबसूरत  चीजों   को  जन्म देता है जिसे शौक कहते हैं  । शिक्षक 2020 ने या यूं कहा जाए कि कोरोना काल  { लॉकडाउन } ने लोगों ने अपने भीतर वर्षों से सोई ऐसी प्रतिभा को जगाया जो समय न मिल पाने के कारण दबी हुई थी ।  लेखन , पाक कला , नृत्य ,  चित्रकला , दस्तकारी जैसी गतिविधियां अनेकों लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर देखने को मिली , और अनेकों की आजीविका का साधन भी बनी । और हमें यह बात सीखने को मिली कि इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में अपने लिए समय निकालना कितना जरूरी है अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो हम अपने ही व्यक्तित्व के सबसे सुंदर पहलू से कभी रूबरू नहीं हो पाएंगे शायद इसीलिए कहा जाता है कि शौक बड़ी चीज है


सबसे कीमती चीज प्रकृति मुफ्त में देती है


हम सभी ने सुना था ,  पढ़ा था लेकिन शायद शिक्षक 2020 ने हमें सिखाया कि धन , दौलत , शोहरत आदि से मूल्यवान चीजें हमें प्रकृति मुफ्त में देती है और निष्काम भाव से सेवा करने का संदेश भी देती है ।  हम सभी ने सोशल मीडिया एवं अन्य उपद्रवों   के   लती बनकर स्वयं को कुदरत की नेमतों से दूर कर लिया था ।  वास्तव में प्रदूषण मुक्त हवा , गिलोय , हल्दी आदि जैसी जड़ी – बूटियां और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली मिट्टी हम सभी के लिए और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए कितने उपयोगी हैं   यह हमने तब जाना जब हम सभी अपने घरों में ठहर गए और बाजारों में ऊंचे दामों पर मिलने वाले रासायनिक खाद्य पदार्थों के साथ – साथ फास्ट फूड , जंक फूड , मांसाहार और शराब आदि से तौबा करने लगे ।  चाहे वह कोरोना   के संक्रमण का डर ही था , लेकिन हम कम से कम यह तो सीखें की प्रकृति की नेमतें  सर्वश्रेष्ठ है , सर्वसुलभ  है  और  मुफ्त  में उपलब्ध  है ।

असली हीरो परदे के पीछे नही आगे काम करते हैं

शिक्षक 2020 ने हम सभी को एक वास्तविकता से परिचित करवाया और सिखाया कि पेड़ों के इर्द – गिर्द नाचने वाले , एक साथ दो लड़कियों प्यार करने वाले और एक ही घूंसे में 5 लोगों को मार गिराने वाले उस सम्मान , प्यार पैसे और जुनून के सच्चे हकदार नहीं है जो हम उन्हें देते थे इन सभी के वास्तविक हकदार हैं वे सभी डॉक्टर , नर्स , एंबुलेंस चालक , पुलिसकर्मी , मीडिया कर्मी , बैंक कर्मी एवं दुकानदार जिन्होंने अपने डर को दरकिनार कर अपना कर्तव्य निभाया और इंसानियत के लिए अपने परिवार तक से कई – कई दिनों तक दूर रहे 2020 ने सिखाया कि जब तक यह लोग हैं तब तक हम हर   मुसीबत से डटकर सामना कर सकते हैं । यह हमारे असली हीरो हैं और हमें इनका तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहिए और सम्मान करना चाहिए ।

शिक्षक 2020 यानी बीते वर्ष ने बहुत सी ऐसी बाते सिखाई जिनका उल्लेख यहां नही हो पाया उसके लिए हम छमा प्रार्थी है  चूंकि हर व्यक्ति कुछ ना कुछ सीख कर ही इन 365 दिनों  को पार कर पाया है तो सबके लिए कुछ सबक औरों से अलग भी होंगे , यहां उन्ही बातों का उल्लेख हुआ है जिसे एक बड़े वर्ग ने महसूस किया ।


दोस्तों ..

अगर रुक कर सोचे तो पाएंगे कि गुजरा समय वर्ष 2020 निश्चित ही हमें बहुत बुरा समय दिखा गया  ।  एक शिक्षक के तौर पर हमें वह पाठ पढ़ा गया जो शायद दुनिया की कोई पाठशाला नहीं सिखाती या पढ़ाती ।

लेकिन किस कीमत पर ??

हम पहले से अधिक सजग , परिपक्व , सशक्त , दयालु और आस्थावान बनकर उभरे ।  निश्चित ही वर्ष 2020 ने एक शिक्षक की तरह हमें परखा , हमारे धैर्य को जांचा और परिणाम स्वरूप हमें से ज्यादातर लोग कुंदन की तरह निखर कर सामने आए । और आगे भी जब – जब परीक्षा की घड़ी आएगी तो हम सभी कुछ न कुछ नया सीखकर यही साबित करेंगे कि हम मनुष्य सच मे ईस्वर की बनाई सर्वश्रेष्ठ कृति है ।
हम आशा करते हैं कि   आप समझ पाएं की क्यों हमनें वर्ष 2020 को एक दुश्मन ना समझ के एक शिक्षक का स्थान दिया साथ ही यही प्रार्थना करते है की नववर्ष 2021 आपके लिए एक नया सवेरा अपने सकारात्मक प्रकाश के साथ आपके जीवन में प्रवेश करें  । यही प्रार्थना करते है ।


धन्यवाद

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