अटल बिहारी वाजपेयी – जीवन से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातें

अटल बिहारी वाजपेयी – जीवन से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातें

अटल बिहारी वाजपेयीअटल बिहारी वाजपेयी

…. टूटे   हुऐ   सपनों  की  कौन  सुने  सिसकी  अंतर  की  चीर  व्यथा  , पलकों  पर  ठिठकी  हार  नही मानूँगा , रार  नहीं  ठानूँगा     काल  के  कपाल  पे  , लिखता  मिटाता  हूँ गीत  नया  गाता  हूँ  ….

अटल बिहारी वाजपेयी


एक सफल राजनेता , पत्रकार , श्रोताओं को सम्मोहित करने वाला वक्ता और हृदय से एक कवि ।  दरअसल उनके व्यक्तित्व के इतने आयाम थे कि किसी एक छवि में उन्हें बांधना असंभव है ।  भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने का उनका उद्देश्य भी उनके नाम की ही तरह अटल था जिसे उन्होंने भली – भांति पूरा किया ।

हम आज जानेंगे  स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी के विषय में जिन्होंने अपने लगभग 60 वर्षों के राजनीतिक जीवन में तीन बार प्रधानमंत्री का पद संभाला अनेकों बार अपने भाषणों से जनता को संबोधित किया लेकिन कभी भी अभद्रता का प्रदर्शन नहीं किया  । आज के दौर में यह  विश्वास करना मुश्किल लगता है कि कभी हमारे बीच ऐसे लोकनायक भी  थे ।


अटल  बिहारी  वाजपेई   जी  :-  प्रारंभिक  जीवन

श्री अटल बिहारी वाजपेई जी का जन्म उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के बटेश्वर में 25 दिसंबर 1924 को पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेई और कृष्णा वाजपेई के घर में हुआ था । उनके पिता पंडित कृष्ण  बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश की   ग्वालियर रियासत   में  अध्यापक के पद पर थे । और साथ ही संस्कृत भाषा के जाने – माने विद्वान भी वहीं उनकी माता धार्मिक स्वभाव की थी  ।  स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी को काव्य  के गुण विरासत में प्राप्त हुए थे  । उनके पिता तो विद्वान थे ही साथ ही उनके दादा पंडित श्याम लाल बाजपेई भी अपने समय के सुविख्यात कथावाचक थे  ।  अटल जी की तीन बहने   विमला , कमला , उर्मिला तथा दो भाई भी  थे । जिनके नाम क्रमशः अवध  बिहारी और सदा बिहारी थे ।  अटल नामक इस बालक   के जीवन में परिवर्तन आना तब शुरू हुआ । जब उन्होंने महात्मा रामचंद्र वीर जी द्वारा रचित कृति विजय पताका को पढ़ा । कहा जाता है   कि इस अमर कृति ने  उनके जीवन की दिशा में परिवर्तन कर दिया इसके उपरांत से मात्र 14 – 15 वर्ष की आयु में ही ग्वालियर में आर्य कुमार सभा में जुड़ गए और इससे संबंधित कार्यक्रमों में भाग लेने लगे ।  वे   इन  विभिन्न कार्यक्रमों में अपने भाषण से अनेकों श्रोताओं को आकर्षित कर देते थे । उनकी इसी कला ने उन्हें मौका दिलाया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता भूदेव शास्त्री से मिलने का ,  जिन्होंने उन्हें संघ से जुड़वाया यह वह समय था जब अटल बिहारी वाजपेई जी को एक प्रखर वक्ता के रूप में पहचाना जाने लगा था । 


अटल  बिहारी  वाजपेयी : – शिक्षा  और  राजनैतिक  जीवन  की  शुरुआत 


कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं । अपने प्रारंभिक शिक्षा गोरख विद्यालय से करने के बाद उन्होंने विक्टोरिया कॉलेज (  वर्तमान में लक्ष्मी बाई कॉलेज के नाम से जाना जाता है ) से उच्च श्रेणी में स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ – साथ कॉलेज की छात्र संघ के मंत्री पद और उपाध्यक्ष के   पद   पर   भी शोभायमान   रहे ।  1942  में   जब   गांधी जी  ने  भारत  छोड़ो  का  नारा  दिया तो  ग्वालियर  में  छात्र  वर्ग   में  भी  आंदोलन  नें  उग्ररूप धारण  कर   लिया ।  अटल जी के पिता , पुत्र  के स्वभाव  को जानते थे उन्हें डर था कि कहीं अटल जी आंदोलन का हिस्सा बनकर जेल ना चले जाएं और इसलिए उन्होंने अटल जी को अपने पैतृक गांव बटेश्वर भेज दिया । लेकिन वहां पर भी आंदोलन शुरू हो चुका था । आंदोलनकारियों ने पुलिस चौकी के साथ – साथ अंग्रेज सरकार की अन्य संपत्तियों जैसे पोस्ट ऑफिस आदि को भी आग के हवाले कर दिया । अटल जी जो अन्य आंदोलनकारियों के साथ जोर – शोर   से नारेबाजी कर रहे थे को पुलिस द्वारा पकड़ लिया गया और उन्हें 24 दिन के लिए बचा – बैरक में रखा गया  ।  अटल जी चाहते थे कि वे आगे चलकर कानून की पढ़ाई करें और इसके लिए वे कानपुर के डीएवी कॉलेज में जाना चाहते थे ।  उस समय इस कॉलेज में अव्व्ल आने वाले विद्यार्थी को वजीफा मिलता था ।  अटल जी अच्छे छात्र थे और   उन्हें  वजीफा मिलने का अवसर भी   प्राप्त हुआ । लेकिन शर्त यह थी कि पढ़ाई के बाद राजशाही के अंतर्गत काम करना होगा ।  अटल जी को यह शर्त मंजूर नहीं थी इसलिए उन्होंने वजीफे   को अस्वीकार कर दिया ।  फिर उनके पिता ने उन्हें अपने खर्चे पर अध्ययन हेतु कानपुर भेजा वहां से अटल जी ने राजनीति शास्त्र में अपना एम . ए.   पूरा किया । इसके उपरांत उन्होंने एलएलबी करने के लिए अपने पिता से इच्छा जताई उनके पिता ने डीएवी कॉलेज में अटल जी के साथ स्वयं भी एलएलबी में   प्रवेश लिया ।


अटल बिहारी वाजपेयी :  लेखन  और  संपादन


बहुमुखी प्रतिभा के धनी अटल जी ने एक लेखक और संपादक की भूमिका को भी बखूबी निभाया ।  अटल जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य के रूप में भी कार्य कर रहे थे ।   जब   कुछ समय पश्चात वे ‘ राष्ट्रधर्म ‘ के   प्रथम संपादक के रूप में नियुक्त  हुए  ।  यह   उनका कुशल   संपादन ही था । जिसके कारण राष्ट्र धर्म को राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाने लगा था ।  उनके संपादकीय  के   प्रशंसकों में  महादेवी वर्मा  , अमृत लाल  नागर , पंडित नारायण चतुर्वेदी  आदि   जैसे रचनाकार  शामिल  थे । उनकी   कुशलता के   कारण   उन्हें  ‘ पंचजन्य ‘ के प्रकाशन  का  कार्य  भी  सौंपा गया । 1948 में सरकार के आदेशों पर राष्ट्र धर्म के  कार्यालय को सील कर दिया गया  । किंतु  कुछ  समय  बाद इलाहाबाद न्यायालय के आदेश पर मई 1948 में कार्यालय को खोल दिया गया । किन्तु अभी अटल जी को कुछ और विरोध झेलना था ।  कुछ समय बाद इलाहाबाद में अटल जी ने ‘  दैनिक  संदेश  ‘  का भी संपादन शुरू कर दिया । किंतु अभी इसके कुछ अंश ही निकल पाए थे कि इसे भी सील कर दिया गया इसके बाद अटल जी द्वारा ‘   चेतना सप्ताहिक ‘ का तथा ‘ वीर अर्जुन ‘ का भी संपादन किया गया ।


अटल बिहारी वाजपेयी : – राजनैतिक गुरु   श्यामा प्रसाद मुखर्जी से भेंट 


आज जिस राजनीतिक दल को हम  भारतीय  जनता   पार्टी  ‘ के   नाम   से  जानते  हैं  उसका  जन्म   भारत  के  एक  पुराने  राजनीतिक   दल ‘  भारतीय  जनसंघ ‘ से  1980   से  हुई  थी  ।  भारतीय  जनसंघ  का  शुभारंभ  या  स्थापना 1951  को  डॉक्टर  श्यामा   प्रसाद  मुखर्जी  द्वारा  किया  गया  था । इस  पार्टी   की  स्थापना  के  बाद   संरक्षक  डॉक्टर  श्यामा  प्रसाद   मुखर्जी  को  अपना निजी   सचिव   बनाने  के   लिए   एक  कर्मठ   व्यक्ति की  आवश्यकता  थी   । और इसके  लिए  उन्होंने अटल जी को चुना ।  अटल जी डॉक्टर मुखर्जी के निजी सचिव के रूप में कार्य करने लगे और पार्टी की सभाओं में उमड़ती भीड़ को संबोधित भी करते थे । जिससे अटल जी को भी धीरे – धीरे राष्ट्रीय स्तर के नेता के रूप में पहचान मिलने लगी ।   अटल जी के साथ – साथ भारतीय संघ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय भी जुड़े थे । कुछ समय बाद अटल जी जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में चुनाव   में   भी उतरे  । लेकिन यहां उन्हें साधनों की कमी के चलते पराजय का सामना करना पड़ा । लेकिन इस हार ने अटल जी के उत्साह में कोई कमी नहीं आने दी । 


अटल बिहारी वाजपेयी : – विदेश मंत्री कार्यकाल 

अटल बिहारी वाजपेयी जी 1957 से 1977 तक जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे । 1962 में राज्यसभा के लिए चुने गए ।   1967 में दोबारा सांसद चुने गए तथा पांचवी लोकसभा में वे फिर से चुनकर संसद पहुंचे । वे  आपातकाल में बंदी भी रहे । आपातकाल के बाद बनी जनता पार्टी की सरकार में वे  विदेश मंत्री बने जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में पार्टी गठित हुई थी ।  अभी दिल्ली में चुनाव के दौरान अस्वस्थ थे फिर भी भारी मतों से विजयी हुए और सरकार में विदेश मंत्री बनाए गए ।  जब अटल जी विदेश मंत्री बनाए जा रहे थे तो उनके विरोधियों ने यह तर्क देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री को चेताया था कि अटल जी मूलतः  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा रखते हैं और वह मुस्लिम देशों जैसे पाकिस्तान आदि के साथ संबंध और खराब कर बैठेंगे ।   लेकिन ठीक इसके उलट उन्होंने पाकिस्तान के उस समय के राष्ट्रपति जिया उल हक से मुलाकात की । कहा जाता है 1977 से 1980 का समय इन  दो  देशों के संबंधों का सबसे अच्छा समय था । बाद में जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ राजीव गांधी के अंतिम संस्कार में शामिल होने भारत आए थे ।   तो उन्होंने अटल जी से कहा था कि उनके विदेश मंत्री के कार्यकाल में भारत के पाकिस्तान के साथ संबंध न सिर्फ सौहाद्रतापूर्ण थे बल्कि इतने अच्छे हो गए थे जितने पहले कभी न थे । 

अटल बिहारी वाजपेयी : – भारतीय जनता पार्टी के पहले अध्यक्ष 


देश के प्रमुख राजनीतिक स्तंभों में से एक भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी ।  यह दिन और वर्ष अटल जी के लिए महत्वपूर्ण रहा । वह पार्टी के प्रथम अध्यक्ष बनाए गए इसी वर्ष कुल 9 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को वह सफलता नहीं मिली जिसकी अपेक्षा थी फिर भी 149 सीटें मिली ।

अटल बिहारी वाजपेयी : –  तीन बार बने देश के प्रधानमंत्री 


अटल बिहारी वाजपेयी जी 1996   से 2004 तक तीन बार प्रधानमंत्री बने 16 मई 1996 को बाजपेई जी ने शपथ ली । लेकिन वे 200 सदस्यों का  आंकड़ा ही जुटा पाए और विश्वास मत से पूर्ण बहुमत न मिलने के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया वे   मात्र 13 दिन  प्रधानमंत्री रहे ।   1998 में सहयोगी दलों के सहयोग से लोकसभा चुनाव में पार्टी को ज्यादा सीटें मिली ।  अटल जी फिर प्रधानमंत्री बने , लेकिन दुर्भाग्यवश एक बार फिर वह कुछ ही समय तक प्रधानमंत्री बने ।  और यह सरकार भी  13 महीने की चल सकी ।  तदुपरांत समय आया सितंबर 1999 में हुए लोकसभा चुनाव का इस लोकसभा चुनाव में भी न किसी पार्टी को इतना स्पष्ट बहुमत मिला कि वह सरकार बना सके और ना स्वयं किसी राजनीतिक दल ने सरकार बनाने की पेशकश की ऐसे में समान विचार वाले सभी दलों  के एक मोर्चे का गठन अटल जी द्वारा किया गया जिसे नाम दिया गया  एनडीए , NDA ( राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन )  सर्वसम्मति से इसका  नेता और जॉर्ज फर्नांडिस  को संयोजक बनाया गया ।  दूसरे शब्दों में भाजपा  फिर   से सत्ता में आई और अक्टूबर 1999 में अटल जी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और अप्रैल 2004 तक  अपना कार्यकाल पूरा किया ।


अटल बिहारी वाजपेयी : – भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनाने में योगदान 


विकसित देशों ने भारत को हमेशा ही पिछड़ा हुआ और हर क्षेत्र में संघर्षरत देश ही समझा । उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि भारत भी परमाणु शक्ति संपन्न देशों की श्रेणी में भी आ सकता है । लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी जी के कार्यकाल में उन देशों की गलतफहमी भी दूर हुई । दरअसल ये परीक्षण पहले हो जाता लेकिन अटल जी की सरकार के मात्र 13 दिनों में गिर जाने से यह परीक्षण अनुमति मिलने के बाद भी ठंडे बस्ते में चला गया ।  फिर अटल जी ने दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ही परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष आर चिदंबरम से मुलाकात की और उन्हें परमाणु परीक्षण करने की अनुमति के साथ शुभकामनाएं भी दी ।   इस समय तथाकथित विकसित और आणविक शक्ति संपन्न देश यह समझ चुके थे  । कि भारत ने परमाणु बम बना लिया है । और वे परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर के लिए दबाव भी बना रहे थे ।  लेकिन 11 और 13 मई 1998 को अटल जी ने पोखरण में परमाणु परीक्षण करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में सबसे परिचित करवाया तथा एक सुदृढ़ वैश्विक शक्ति के रूप में देश को पूरे विश्व में स्थापित किया । यह   कार्य  इतनी गोपनीयता से किया गया की  दूसरे देशों के जासूसी उपग्रहों को इसकी भनक तक नहीं लगी । हालांकि इसके बाद देश को कई समस्याओं एवं दूसरे देशों द्वारा भारत पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी सामना करना पड़ा लेकिन अटल बिहारी वाजपेई जी ने झुकने की अपेक्षा दृढ़ता पूर्वक उनका मुकाबला किया । अटल जी  मानते थे कि कभी – कभी राष्ट्र की अस्मिता को बनाए रखने के लिए शक्ति प्रदर्शन की जरूरत पड़ती है ।


अटल बिहारी वाजपेयी : – एक कवि हृदय नेता 


भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी एक कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ – साथ एक कवि भी थे । ‘ मेरी इक्यावन कविताएं ‘ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है तथा उनकी प्रमुख रचनाएं हैं ।

बिंदु बिंदु विचार

सेक्युलरवाद

कुछ लेख  कुछ भाषण

अगर आग है

राजनीति की रपटीली राहें

संसद में तीन दशक

मृत्यु या हत्या

कैदी कविराम की कुंडलियां

रग रग हिंदू मेरा परिचय  आदि ।

अटल बिहारी वाजपेई जी की कविताएं पत्थरों में जान फूंक सकती हैं । उनकी पहली कविता ताजमहल पर थी जो ताजमहल के कारीगरों पर केंद्रित थी । शायद यह  अटल जी के भीतर का कलाकार ही   था जो वह इतने वार्ता कुशल और हास्य वृति ( सेन्स ऑफ़ ह्यूमर ) से लबरेज व्यक्तित्व के स्वामी थे ।  कि उनके कट्टर विपक्षियों से भी उनके आआत्मिक संबंध थे ।  स्वर्गीय गजल गायक जगजीत सिंह ने अटल जी की कुछ कविताओं को चुनकर और उन्हें संगीत में पिरो कर एक एल्बम भी  निकाला था । 


अटल बिहारी वाजपेयी : – चिरनिद्रा में विलीन एक युगपुरुष 

2009 में अपने स्नानघर में अटल जी एक स्ट्रोक आया था । जिसके बाद वे  कोमा में चले गए और 22 दिन बाद कोमा से बाहर आए ।  डॉक्टरों द्वारा लगाए एक फूड पाइप के जरिए उन्हें तरल  खाना खिलाया जाता था ।  इसके बाद वे बोलने में सक्षम नहीं रह गए थे । उन्हें 11 जून 2018 में किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण एम्स में भर्ती कराया गया था ।  एम्स में भर्ती होने पहले वह पुरानी फिल्में और मराठी नाटक देखते थे । 16 अगस्त 2018 को शाम 05:05 पर उन्होंने अंतिम सांस ली  । उनके साथ ही राजनीति के एक युग का अंत हो गया । उनकी अंत्येष्टि राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर यमुना के किनारे की गई । उनकी शव यात्रा में लाखों लोग दिल्ली की सड़कों पर उतर आए थे ।  अटल जी जो स्थान रिक्त छोड़ गए उसकी भरपाई तो नहीं हो सकती किंतु वह भारत वासियों के दिलों में सदैव अमर रहेंगे ।


अटल बिहारी वाजपेयी : – कुछ रोचक तथ्य 


■ अटल जी आज के नेताओं की तरह पढ़कर भाषण नहीं देते थे । वह भाषण से पहले  घंटों गहन चिंतन करते थे । इतना ही नहीं वे रैलियों में जाने एवं भाषण से पूर्व कई बार घंटों एक शब्द भी नहीं बोलते थे .. शायद उनकी वाणी में इतना आकर्षण गहन मंथन के बाद ही आता था ।  जो लोग उन्हें मंत्रमुग्ध होकर सुनते थे यहां तक कि लाहौर में उनका भाषण सुनकर पाकिस्तानियों ने भी उनकी तारीफ की थी ।

■ अटल बिहारी वाजपेई जी ने 2007 में अपना अंतिम राजनीतिक भाषण पंजाब के अमृतसर में दिया था ।

 
■ अटल बिहारी वाजपेई जी की कुछ बड़ी उपलब्धियों में से एक थे मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम का नाम राष्ट्रपति के लिए सुझाना ।  अटल जी द्वारा इनका नाम   सुझाये जाने पर सारे विरोधी शांत होकर अटल जी के समर्थन में आ गए थे ।


■ अटल जी पहले प्रधानमंत्री थे जो गैर कांग्रेसी थे और जिन्होंने ने 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया था । 


■ अटल जी 1973 में बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे कारण था पेट्रोल ,  डीजल के बढ़ते दामों का विरोध करना । 


■ अटल जी ने देश के चारों कोणों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज योजना की शुरुआत की थी । 


■  अटल बिहारी वाजपेई जी अकेले ऐसे सांसद थे जो उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश , दिल्ली एवं गुजरात चार अलग – अलग राज्यों से सांसद थे । 


■  अटल बिहारी वाजपेई जी के कार्यकाल में सबसे ज्यादा सड़कों का निर्माण हुआ । 


■ अटल बिहारी वाजपेई जी पहले ऐसे विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण दिया था । 


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कुछ समय पूर्व अटल जी की जयंती पर अटल भूजल योजना और अटल टनल योजना दो महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की है । अटल जी के  प्रेरणामय जीवन से जुड़ी बातों को आपके सम्मुख रखने के लिए हमनें कुछ पत्रिकाओं आदि से जानकारी ली  है , जिसके लिए हम उनके  आभारी हैं  । अगर  इसमें कुछ त्रुटि हो तो हम क्षमा प्रार्थी हैं । 


उम्मीदें   है  आपको  ये  लेख  पसंद  आएगा  हर   बार  की  तरह  इस  बार भी  आप  की  शिकायतों  और  सुझावों  का  इंतजार  रहेगा । 

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