प्यार,रोमांस,दोस्ती और जीवन पर 51+सर्वश्रेष्ठ गुलज़ार शायरी | 51+ Best Gulzar Shayari on love and romance

प्यार,रोमांस,दोस्ती और जीवन पर 51+सर्वश्रेष्ठ गुलज़ार शायरी | 51+ Best Gulzar Shayari on love and romance

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दोस्तों ..

बाकी बातें बाद में , पहले आप बताइये की ..

सम्पूर्ण सिंह कालरा क्या आप इस नाम से परिचित हैं ??
सम्भवतः नहीं …
लेकिन अगर आपसे पूछा जाए की क्या आप ‘ गुलज़ार ‘ नाम से परिचित हैं ??
तो बगैर एक मिनट भी बर्बाद किये आप ‘ हाँ ‘ में उत्तर देंगे ..
कारण ??
लगभग हर पीढ़ी को अपने निर्देशन , गीतों , पटकथा लेखन और कविताओं से दीवाना बना देने वाले शख्स से भला नया और पुराना जमाना कैसे अनजान रह सकता है ??
गुलज़ार साहब उन भाग्यशालियों में से हैं जिन्होंने इंडस्ट्री के कुछ बड़े नामों के साथ काम किया है , साथ ही उन्होंने रिहाना , केंड्रिक लैमर और ड्रेक जैसे कलाकारों के लिए रिकॉर्ड तैयार किए हैं ।

बात करते हैं उस चीज की जिसकी वजह से गुलजार साहब युवा दिलों के चहेते माने जाते हैं ..
.. जी हाँ .. सही पकडे हैं .. वह है …
गुलजार की शायरी ..

गुलज़ार की शायरी क्या है ?

अगर आप परिभाषा जानना चाहते हैं तो बुनियादी तौर पर गुलज़ार शायरी एक प्रकार की कविता है जिसकी उत्पत्ति पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में हुई थी । यह आमतौर पर उर्दू या पंजाबी में लिखा जाता है , और इसमें अक्सर प्यार , नुकसान और दिल टूटने के विषय होते हैं । गुलज़ार शायरी अपने अत्यधिक भावनात्मक जुड़ाव , टकराव , मिलन , अलगाव आदि के लिए जानी जाती है । और यह प्रसिद्ध इसीलिए है क्यों की युवा से लेकर उम्रदराज़ तक इंसान कभी न कभी इन स्थितियों से गुज़रता है .. और जब वह गुलजार की शायरी को सुनता या पढ़ता है तो कहीं न कहीं भीतर एक रिक्त स्थान { खाली जगह } को भरता हुआ पाता है या जुड़ाव महसूस करता है ..क्या आप भी गुलज़ार की शायरी को महसूस करना चाहते हैं तो आइये चलते है .. एक ऐसे सफ़र पर जो कुछ लोगों के लिए जाना – पहचाना है और कुछ के लिए अनजाना …

Best Gulzar Shayari in Hindi | गुलजार की कुछ चुनिंदा शायरी

वो जो उठातें हैं
क़िरदार पर उंगलियां ,तोहफे में उनको
आप आईने दीजिए

एक सुकून की तलाश में जाने कितनी बेचैनियाँ पाल ली ,
और लोग कहते हैं की हम बड़े हो गए हमने ज़िंदगी संभाल ली ।

सूखे पत्तों की तरह बिखरे हुए थे हमं ,
किसी ने समेटा भी तोह सिर्फ जलाने के लिये ..

ना राज़ है “ ज़िन्दगी ”,
ना नाराज़ है “ ज़िन्दगी ”,
बस जो है , वो आज है ज़िन्दगी

नहीं बदल सकते हम खुद को औरों के हिसाब से
एक लिबास हमें भी दिया है खुदा ने अपने हिसाब से ..

समेट‬लो इन ‪ हँसते ‬ हुये ‪ ‎नाजुक ‬‪ पलो ‬ को
ना‪ जाने ‬ ये ‪ ‎लम्हे ‬ कल हो ना हो
हो भी ये लम्हे क्या‪ मालुम‬
‎शामिल‬ उन पलो में‪ हम‬ ना हो

तकलीफ खुद की कम हो गई
जब अपनों से उम्मीद कम हो गई ..

दर्द की भी अपनी एक अदा है,
वो भी सहने वालों पर फ़िदा है..

तुझको बेहतर बनाने की कोशिश में
तुझे ही वक़्त नहीं दे पा रहे हम
माफ़ करना ऐ जिंदगी
तुझे ही नहीं जी पा रहे हम ..

जब मिला शिकवा अपनों से तो ख़ामोशी ही भलीं ,
अब हर बात पर जंग हो यह जरुरी तो नहीं ..

हँसना हँसाना आता हैं मुझे ,
मुझसे गम की बात नहीं होती ,
मेरी बातो में मज़ाक होता हैं ,
मेरी हर बात मज़ाक नहीं होती

तन्हाई की दीवारों पर
घुटन का पर्दा झूल रहा हैं ,
बेबसी की छत के नीचे ,
कोई किसी को भूल रहा हैं

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते ,
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते ..

थोडा है थोड़े की ज़रूरत है ,
ज़िन्दगी फिर भी यहाँ की खुबसूरत है

लगे न नज़र इस रिश्ते को जमाने की ,
हमारी भी तमन्ना है.
मरते दम तक आपसे दोस्ती निभाने की

कुछ सुनसान पड़ी है ज़िंदगी ,
कुछ वीरान हो गए है हम ,
जो हमें ठीक से जान भी नहीं पाया ,
खामखां उसके लिए परेशान हो गए है हम ।

जो जाहिर करना पड़े ,
वो दर्द कैसा ,
और जो दर्द न समझ सके ,
वो हमदर्द कैसा

तजुर्बा बता रहा हूँ ऐ दोस्त दर्द , गम , डर जो भी है
बस तेरे अन्दर है ,
खुद के बनाए पिंजरे से निकल कर तो देख ,
तू भी एक सिकंदर है

सोचा नहीं था जिंदगी में ऐसे भी फसाने होगे ,
रोना भी जरुरी होगा और आसू भी छुपाने होगे

घर गुलजार सुने शहर ,
बस्ती – बस्ती में कैद हर हस्ती हो गई ,
आज फिर जिंदगी महंगी और
दौलत सस्ती हो गई ।

इतने बुरे नहीं थे हम
जितने इलज़ाम लगाये लोगो ने ,
कुछ किस्मत ख़राब थी
कुछ आग लगाई लोगो ने

.. दोस्तों के नाम का इक ख़त
जेब मे रखकर क्या चला
क़रीब से गुजरने वाले पूछते हैं
इत्र का नाम क्या है……

बेहिसाब हसरते ना पालिए,
जो मिला हैं उसे सम्भालिए ।

कौन कहता है कि हम झूठ नहीं बोलते
एक बार खैरियत तो पूछ के देखिये..

खून निकले तो ज़ख्म लगती है
वरना हर चोट नज़्म लगती है…

उड़ते पैरों के तले जब बहती है जमीं
मुड़के हमने कोई मंज़िल देखी तो नही
रात दिन हम राहों पर शामो सहर करते हैं
राह पे रहते हैं यादों पे बसर करते हैं..


जिंदगी ये तेरी खरोंचे हैं मुझ पर
या फिर तू मुझे तराशने की कोशिश में हैं .

लाजमी सी बात है साहब जिंदगी की ये भी ,
की यहा भरोसा निभाने वाले कम और भरोसे के,
साथ खेलने वाले पर ज्यादा भरोसा किया जाता है..

Best Gulzaar Shayari On Love | मोहब्बत पर गुलजार की शायरी

इश्क एक रोग है कहते है मेरे मोहल्ले के लोग आजकल ,
में कहता हूँ की एक रोग से एक बार बीमार बन के तो देखो..

मंजर भी बेनूर था और
फिजायें भी बेरंग थीं
बस फिर तुम याद आये
और मौसम सुहाना हो गया !

जागना भी काबुल है तेरी यादों में रातभर ,
तेरे अहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ !


तुम मिले तो क्यों लगा मुझे
खुद से मुलाकात हो गई
कुछ भी तो कहा नहीं
मगर ज़िन्दगी से बात हो गई..

जब से तुम्हारे नाम की
मिसरी होंठ लगाई है
मीठा सा गम है ,
और मीठी सी तन्हाई है…

तेरे इश्क़ में तू क्या जाने
कितने ख्वाब पिरोता हूं
एक सदी तक जागता हूं मैं
एक सदी तक सोता हूं..

प्यार में अज़ीब ये रिवाज़ है,
रोग भी वही है जो इलाज है.

कोई वादा नही किया लेकिन
क्यों तेरा इंतज़ार रहता है
बेवजह जब क़रार मिल जाए
दिल बड़ा बेकरार रहता है ..

वो चेहरे जो रौशन हैं लौ की तरह
उन्हें ढूंढने की जरूरत नही
मेरी आँख में झाँक कर देख लो
तुम्हें आइने की जरूरत नही ..

मुस्कुराना ,सहते जाना , चाहने की रस्म है
ना लहू ना कोई आँसू इश्क़ ऐसा ज़ख्म है..

हमने देखी है उन आँखों की खुशबू
हाथ से छूके इसे रिश्तों का इल्ज़ाम न दो
सिर्फ़ एहसास है ये रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो..

कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे..

वो सज़दा ही क्या
जिसमे सर उठाने का होश रहे
इज़हारे इश्क़ का मज़ा तो तब है
जब मैं खामोश रहूँ और तू बैचेन रहे ।

जा उनसे पूछ, उनके दीदार की कीमत
अगर वह जान भी मांगे तो सौदा कर आना..

आ रही है जो चाप क़दमों की
खिल रहे हैं कहीं कँवल शायद..

याद आएगी हर रोज़ मगर
तुझे आवाज़ ना दूँगा ,
लिखूँगा तेरे ही लिए हर ग़ज़ल
मगर तेरा नाम ना लूँगा ।

मोहल्ले की मोहब्बत का भी
अजीब फ़साना है..
चार घर की दूरी है और
बीच मे सारा ज़माना है…!

चांदी उगने लगी है बालों में
उम्र तुम पर हसीन लगती है..

Heart touching Gulzar Shayari | गुलज़ार की दिल छु लेने वाली शायरी

कब आ रहे हो मुलाकात के लिए
मैंने चांद रोका है एक रात के लिए..

बेशूमार मोहब्बत होगी उस बारिश  की बूँद को इस ज़मीन से,
यूँ ही नहीं कोई मोहब्बत मे इतना गिर जाता है ..

“खता उनकी भी नहीं यारो वो भी क्या करते ,
बहुत चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करते “

काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी
तीनों थे हम वो भी थे और मैं भी था तन्हाई भी..

खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं ,
हवा चले न चले दिन पलटते रहते हैं ..

हम अपनों से परखे गए हैं कुछ गैरों की तरह ,
हर कोई बदलता ही गया हमें शहरों की तरह….!

तमाशा करती है मेरी जिंदगी ,
गजब ये है कि तालियां अपने बजाते हैं ..

बदल जाओ वक़्त के साथ या वक़्त बदलना सीखो,
मजबूरियों को मतं कोसो, हर हाल में चलना सीखो ..

कहानी शुरू हुई है तो खतम भी होगी
किरदार गर काबिल हुए तो याद रखे जाएंगे..

ये वक्त है की कटता भी नही और रुकता भी नही ,
 इश्क सजदे में जरुर है लेकिन कमबख्त झुकता भी नही ..

कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की

बहुत छाले हैं उसके पैरों में
कमबख्त उसूलो पर चल होगा..

आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ए’तिबार किया

ये शुक्र है कि मिरे पास तेरा ग़म तो रहा
वगर्ना ज़िंदगी ने तो रुला दिया होता..

तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं..

गुलज़ार की शायरी उनके द्वारा जीवन के विभिन्न पहलुओं पर लिखी गयी हैं .. क्या एक बार आप नहीं जानना चाहेंगे की जीवन वास्तव में है क्या ? .. क्यों जीवन को लेकर हर इंसान की सोच में फर्क है .. तो आइये जानने की कोशिश करते हैं .. अग्रलिखित पोस्ट में ..जीवन की परिभाषा

5 Selected Ghazals Of Gulzar Which I Like Very Much | मेरी पसंदीदा गुलज़ार की ५ चुनिंदा ग़ज़लें

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई
दिल में कुछ यूँ सँभालता हूँ ग़म
जैसे ज़ेवर सँभालता है कोई
आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
पेड़ पर पक गया है फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई
देर से गूँजते हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई ..

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दर्द हल्का है साँस भारी है
जिए जाने की रस्म जारी है
आप के ब’अद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो
दिन की चादर अभी उतारी है
शाख़ पर कोई क़हक़हा तो खिले
कैसी चुप सी चमन पे तारी है
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है

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हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते
जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन
ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते
लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो
ऐसे दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते
जागने पर भी नहीं आँख से गिरतीं किर्चें
इस तरह ख़्वाबों से आँखें नहीं फोड़ा करते
शहद जीने का मिला करता है थोड़ा – थोड़ा
जाने वालों के लिए दिल नहीं थोड़ा करते
जा के कोहसार से सर मारो कि आवाज़ तो हो
ख़स्ता दीवारों से माथा नहीं फोड़ा करते.

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ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में
रात गुज़रते शायद थोड़ा वक़्त लगे
धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में
जाने किस का ज़िक्र है इस अफ़्साने में
दर्द मज़े लेता है जो दोहराने में
दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में
हम इस मोड़ से उठ कर अगले मोड़ चले
उन को शायद उम्र लगेगी आने में .

मंजर

रुके – रुके से क़दम रुक के बार – बार चले
क़रार दे के तिरे दर से बे – क़रार चले
उठाए फिरते थे एहसान जिस्म का जाँ पर
चले जहाँ से तो ये पैरहन उतार चले
न जाने कौन सी मिट्टी वतन की मिट्टी थी
नज़र में धूल जिगर में लिए ग़ुबार चले
सहर न आई कई बार नींद से जागे
थी रात रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले
मिली है शम्अ’ से ये रस्म-ए-आशिक़ी हम को
गुनाह हाथ पे ले कर गुनाहगार चले .

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मित्रों …

आशा है आपको यह पोस्ट पसंद आयी होगी .. भविष्य में हमारे प्रयास रहेंगे की गुलज़ार साहब की कलम से निकले जितने और बेहतरीन मोती हैं जिन्हे हम यहाँ नहीं लिख पाएं हैं वह हमें अपने पाठकों के लिए मिल सकें हम उन्हें इसी पोस्ट में समय – समय पर अपडेट करते रहेंगे ..
भविष्य की शुभकामनाओं के साथ..

धन्यवाद

Written by
Prateek
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