हिंदी दिवस 2020

हिंदी दिवस 2020

हिंदी दिवसहिंदी दिवस

हिंदी दिवस प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला सिर्फ एक साधारण दिवस नहीं है “ हिंदी हमारा परिचय है यह परिचय प्रभावपूर्ण भी बन सकता है और निष्क्रिय भी यह निर्भर करता है इस बात पर कि आप हिंदी को लेकर संकोच महसूस करते हैं या गौरव ”

किसी शहर में सुनार की एक दुकान थी । दुकान बहुत बड़ी थी और सोने एवं चांदी के जेवरातों  सजी रहती थी । सुरक्षा की दृष्टि से सुनार ने दुकान के नीचे ही घर बना रखा था ।  ताकि दुकान में कभी चोरी जैसी दुर्घटना हो तो वह सतर्क रहें।
एक रात को सुनार सो रखा था , की दुकान में शॉर्ट – सर्किट से आग लग गई । देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया । घर के सारे सदस्य अपनी – अपनी जान बचाने बाहर भागे ।

आग बढ़ती देख कर पड़ोसी भी इकट्ठा हो गए । और परिवार के सदस्यों को सकुशल देखकर दुकान में रखे जेवरातों एवम अन्य क़ीमती सामान को सुरक्षित बाहर निकालने लगे । जब उन्होंने सारे जेवर और कीमती सामान बाहर निकाल दिये तो घरवालों से पूछा कि “अंदर कोई और तो नहीं है ?? कोई सामान या कोई अन्य सदस्य ” ?? घरवाले जो बदहवास स्थिति में थे , कुछ कह नहीं पाए ।

उन्होंने दुखी स्वर में कहा हमें अंदाजा नहीं कि क्या है और क्या नहीं ?? आप लोग कृपया खुद ही देख लीजिए । आग बुझाने वाले घर के सदस्यों का जवाब सुनकर निश्चिंत हो गए कि अब घर में कुछ नहीं । जो कुछ था उन्होंने सुरक्षित बाहर निकाल दिया । और वह पानी डाल – डाल कर दुकान और भवन के बाकी बचे हिस्सों में लगी आग बुझाने लगे । लेकिन इस अफरातफरी में दुकान के मालिक पर किसी का ध्यान नहीं गया जो अपने शयनकक्ष में सो रखा था ।

आखिरकार जब आग पूरी तरह बुझ गई तो सबको ध्यान आया की मालिक कहां है ?? सभी ने उसकी तलाश शुरू कर दी ।  लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और सुनार सहायता के अभाव में अंदर ही धुएँ की घुटन और आग के कारण मर गया । ( इस कहानी का हिंदी भाषा से क्या संबंध है वह आपको आगे पता चलेगा )

हम हिंदी दिवस क्यों मनाते हैं ??

आइये जानते हैं कि हम हिंदी दिवस क्यों मनाते हैं ?? आर्यव्रत की पहचान अर्थात हमारी मातृभाषा हिंदी , के साथ भी ऐसा ही होता प्रतीत हो रहा है । जैसा कहानी के नायक उस सुनार के साथ हुआ । हम लोग कीमती या मूल्यवान समझ कर अपनी पश्चिमी देशों की नकल करने की प्रवृत्ति को ज्यादा महत्व देते हैं । बजाय हमारी मातृभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के और हिंदी संस्कृति को महत्व देने के । हमारी मातृभाषा हमारी पहचान होती है । और अगर मातृभाषा हिंदी हो तो गौरव करना स्वाभाविक है । क्यों की भारतीयों ने पुरे विश्व में संगीत के सा रे गा मा से लेकर विज्ञान के अल्फा , बीटा , गामा तक में अपना लोहा मनवाया है , अपना परचम लहराया है ` ।

लेकिन ..

इसे दुर्भाग्य नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे ??  जो हम और खासकर युवा पीढ़ी आधुनिकता के रंग में इतने रंग चुके हैं । कि अपनी मातृभाषा का प्रयोग करने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं या शर्माते हैं और सोचते है की लोग क्या कहेंगे हम हिंदी दिवस इसलिए मनाते हैं ताकि हम हिंदी भाषा का महत्व समझ सकें और समझा सकें । तथा हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करके अपने पास उपलब्ध संसाधनों द्वारा इसका प्रचार एवम प्रसार कर सकें । हिंदी को राजभाषा का स्थान तो १४ सितंबर १९४९ को ही दे दिया गया था । लेकिन १९५३ से प्रत्येक वर्ष की १४ सितंबर को हिंदी दिवस नियमित रूप से मनाया जा रहा है ।

हिंदी भाषा को महत्व न देने का क्या कारण  हो सकता है ??

हम ऐसे समाज में रहते हैं तथा काम करते हैं । जहां हिंदी दिवस तो बड़े चाव और दिखावे के साथ मनाया जाता है लेकिन अच्छी हिंदी बोलने , पढ़ने और लिखने के बजाय अच्छी अंग्रेजी बोलने , पढ़ने और लिखने वाले को प्रमुखता दी जाती है । यह काफी हद तक ठीक भी है । क्योंकि अंग्रेजी विश्व में  सर्वाधिक  प्रयोग किए जाने वाली भाषा है ।

इसका ज्ञान होना व्यवसायिक , शैक्षणिक एवं सामाजिक उन्नति के लिए आवश्यक भी है । लेकिन इस हद तक नहीं कि आप अपने बच्चे को कहें कि देश 15-अगस्त 47 को आजाद हुआ था और बच्चा अपना सर खुजाते हुए आपसे पूछे सैंतालीस को इंग्लिश में क्या कहते हैं ?? और फिर आपको उसे बताना पड़े कि सैंतालीस को इंग्लिश में फोर्टी सेवन कहते हैं ।

दूसरी संस्कृति और भाषा का सम्मान करना बताता है । कि आप शिक्षित एवं संस्कारी हैं । लेकिन आधुनिक बनने की चाह में अपनी संस्कृति अपनी भाषा को महत्व न देना और ना अपनी संतानों को देने देना क्या बताता है ??

कुछ  महापुरुष सोशल मीडिया या अपने विद्यालय एवं अपने दफ्तरों के प्रांगण में बैठकर यह तर्क देते हैं । की हिंदी के कुछ शब्द बोलने और समझने में कठिन है । और यह भाषा अंग्रेजी के जितनी सहज एवं सरल नहीं है !  मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि जब उन्हें अंग्रेजी में कोई कठिन शब्द सुनने या पढ़ने को मिलता है तो क्या वह गूगल या शब्दकोश नहीं  खंगालते ??

कोई कार्य या शब्द कितना भी कठिन क्यों ना हो लेकिन लगातार प्रयोग करने से सरल हो जाता है यह अभ्यास का नियम है । हम यह अभ्यास का नियम अंग्रेजी भाषा को सीखने के लिए तो करते हैं लेकिन अपनी मातृभाषा को निखारने के लिए नहीं । क्यों ?

कारण साफ है : –

‘ घर की मुर्गी दाल बराबर ‘

दोस्तों ….. जिस तरह से टेलीविजन से लेकर विद्यालयों तक और सोशल मीडिया से लेकर निजी तकनीकी संस्थानों एवं निजी दफ्तरों तक में अंग्रेजी का दबदबा कायम है । उससे लगता है कि अपनी मातृभाषा हिंदी धीरे – धीरे कम और फिर दशकों बाद विलुप्त ना हो जाए । अगर जल्द ही हम छोटे – छोटे प्रयासों द्वारा अपनी मातृभाषा हिंदी को अपने जीवन में एक अनिवार्य स्थान नहीं देंगे तो यह दूसरी भाषाओं से हो रही स्पर्धा में बहुत पीछे रह जाएगी । लेेकिन इस हिंदी दिवस पर हम क्या प्रण ले सकते हैं , आइये जानतेे हैंं ।

हम हिंदी दिवस पर क्या करने की शुरुआत कर सकते हैं , जिससे आने वाली पीढ़ी हिंदी भाषा के महत्व को समझे 


(1) –  जगाएं बच्चों में हिन्दी के प्रति रुचि : –  बेशक आप घर में या बच्चों के साथ बाहर अंग्रेजी का प्रयोग करें । लेकिन अपनी हिंदी को नजरअंदाज किए बगैर । उन्हें बताएं कि पूरा विश्व हमें हिंदुस्तानियों के रूप में जानता है और हिंदुस्तान की आत्मा है हिंदी । इसलिए इसका सम्मान करें ।


(2 ) – साहित्य के माध्यम से जगाएं हिंदी के प्रति रुचि : – उन्हें ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजक पुस्तकें हिंदी में पढ़कर सुनाएं या पढ़ने के लिए दें यह बातें उनके अंदर अपनी मातृभाषा के प्रति रुचि उत्पन्न करेगी । अगर आप उन्हें जेके राउलिंग के बारे में बताते हैं तो उन्हें प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद आदि के विषय में भी अवगत कराए ।


(3) : – महान व्यक्तित्वों के माध्यम से हिंदी भाषा का महत्व समझाएं : – हिंदी बोलना , पढ़ना और लिखना पिछड़ेपन की बात नहीं वरन अपनी जड़ों को सम्मान देने की बात है । जब जड़े मजबूत होती हैं तभी वृक्ष भी हरा भरा रहता  है । उन्हें बताएं कि हमारे देश में स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जैसे व्यक्तित्व भी थे । जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र में पहली बार हिंदी में भाषण देकर प्रत्येक भारतवासी को गौरवान्वित किया था ।


हिंदी दिवस देश का पर्व और हिंदी भाषा देश की आवाज़ :

 गढ़वाली , मलयाली ,  बांग्ला , पंजाबी ,  कन्नड़ आदि अलग – अलग प्रांतों की भाषाएं  हो सकती है  । लेकिन हिंदी पूरे देश का स्वर है पूरे देश की आवाज है । हमारी हिंदी हमारा परिचय है । यह परिचय प्रभावपूर्ण भी बन सकता है और निष्क्रिय भी । निर्भर करता है इस बात पर कि आप हिंदी को लेकर संकोच महसूस करते हैं या गौरव ।

हिंदी दिवस

दोस्तों  ये हम सभी हिंदीप्रेमियों का विश्वास है , की हमारे द्वारा किये गए छोटे – छोटे प्रयास बड़ा परिवर्तन लाने की योग्यता रखते हैं , बस आवश्यकता है उन्हें सही रूपरेखा देने की । मेरी योजना मेरे इस ब्लॉग के माध्यम से हिंदी की सुगंध को चारों तरफ फैलाने की है । और आपकी ??? 


आशा करता हूँ हिंदी दिवस पर ये पोस्ट पसंद आएगी । हर बार की तरह इस बार भी आपकी शिकायतों और सुझावों का  इंतजार रहेगा ।


धन्यवाद 

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