पोर्न वीडियो देखने की लत से छुटकारा पाएं ? ?

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संभोग   एक  भावनात्मक   जुड़ाव { Emotional connection }   है  । यह  प्रेम   जताने   और  नए  भौतिक  शरीर  को   जन्म  देने  में  सहायक  होता  है  ।  लेकिन पोर्नोग्राफी  इस  प्रकृति प्रदत्त  भावनात्मक  जुड़ाव  को  एक  घटिया और विकृत  मानसिकता   में   बदल   देता  है 

पोर्न विडिओ , एडल्ट फिल्मे हमारे  रोजमर्रा  के  जीवन  पर   क्या प्रभाव  डालती  है  । और  किस  प्रकार  हमारे  लिए  नुकसानदेह   है …आइए   जानने  की   कोशिश   करते   हैं  –

सेक्स  एक  ऐसा  विषय  है   जो  १२  से  १४  वर्ष  की  आयु  पार  करने   के  बाद  हर  किसी   के  लिए  कौतूहल  और  मजे   का विषय  बन  जाता  है  ।हम  चोरी – छुपे  इंटरनेट  , दोस्तों , किताबों  और  टीवी  आदि  माध्यमों  से  इसके  बारे   में   जानने   को  उत्सुक  रहते   हैं  ।  लेकिन सामाजिक  डर   और  पारिवारिक   मूल्यों   के  कारण   किसी  अनुभवी  से  इस  विषय   में  पूछने   में  डरते  हैं  ।  ऐसे   में  एक  चीज   हमारी  उत्सुकता   को  और  कल्पनाओं  को  नए पंख  लगाती  है ।  और  सेक्स  संबंधी  हमारी  खोज  को  एक  गलत  दिशा  की  तरफ   बढ़ाती  है  ।  हम  बात  कर  रहे  हैं  पोर्न  वीडियो / अश्लील  फ़िल्मों  की  ।


पोर्न वीडियो  क्या  है  : – परिभाषा  और  उद्देश्य |
What is porn: – Definition and purpose

पोर्न वीडियो / फिल्में , अश्लील वीडियो  ,  XXX ,  ब्लू फिल्म  आदि   वास्तविकता  में  ऐसी  फिल्में   या   ऐसे   वीडियो   होते   हैं  ।  जिनमें   खुले   तौर   पर  प्राकृतिक  और  ज्यादातर   अप्राकृतिक   रूप  से   सेक्स  ,  कामक्रीड़ा  को  दर्शकों    की  कामेच्छा   को  उत्तेजित  करने   के   लिए  बनाया  जाता   है । इस  तरह   की  फिल्में  टीनएजर्स   से  लेकर   अधेड़   उम्र   तक     के  लोगों   द्वारा    देखी  जाती  हैं  ।  जिसमें  महिलाएं  भी शामिल   होती  है  ।

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उद्देश्य : –  मुख्य  रूप  से  अश्लील  फिल्मों  के   निर्माण  और  इनमें  काम  करने  का  उद्देश्य   पैसा  कमाना  ही  होता  है  । और   इसके  निर्माता  एवं  कलाकार  इस  तरह  की   फिल्मों  से  अच्छा  खासा  पैसा   कमाते  हैं  ।  इन  फिल्मों  को  सामाजिक  बंधनों  के   कारण   सार्वजनिक   तौर   पर  प्रदर्शित  नहीं  किया  जाता  है  ।  इसके  बावजूद  भी   इनका  एक   बड़ा   दर्शक  वर्ग  होता   है  । एक  अनुमान   के   मुताबिक   प्रत्येक   सेकंड  लगभग   २८०००  लोग  इंटरनेट  पर   पोर्न   वीडियो   देखते   हैं  ।  और   जिस   तरह  से  जनसंख्या   और  विज्ञान   प्रगति  कर  रहे  हैं   इस  तरह  की  अश्लीलता   के  शौकीनों   में  भी   दिन  दूनी   और  रात  चौगुनी  तरक्की   हो   रही   है  ।  ये  बताती  है  कि  हम  किस  दिशा में  जा  रहे   हैं  ।


• क्या  पोर्न  वीडियो या  अश्लील  वीडियो  देखनी  चाहिए   ? | Should we watch porn or Adult videos ?


यह   पूरी   तरह   आपके   विवेक   पर   निर्भर   करता   है  ,  लेकिन  पोर्न वीडियो  के  संबंध में  यह  समझ  लेना  आवश्यक   है  ।  कि  अगर  १००  लोग  पोर्न  या   किसी  अन्य  प्रकार   का  अश्लील  वीडियो  देख   रहे  है  । तो  उनमें  से   ९५  लोग  उसे  अपने  से  छोटो   से  और  बड़ों   से   छुपकर  देखतें   है  ।  अब  अपने  आप  से  पूछिए  –


◆ जब  आप  अपने  ऑफिस  में  या  दुकान  जाते   हैं   तो  क्या  किसी  से  छुप  कर  जाते   हैं  ।

◆ जब  आप   सब्जी ,   घरेलू  सामान   या   दवाइयां  लेने  जाते  हैं  तो  क्या  किसी  से   छुपकर  जाते   हैं ।

◆ जब  आप  विद्यालय  या  कॉलेज  में  या  किसी  समारोह  में  जाते  हैं  तो  क्या  किसी  से  छुप  कर  जाते  हैं ।

◆ जब  आप  मंदिर ,  मस्जिद ,   गुरुद्वारा , चर्च  में  जाते  हैं   तो  क्या  किसी  से   छुप   कर   जाते  हैं  ।

◆ जब  आप  कोई  धार्मिक  या  पारिवारिक  टीवी  सीरियल  और    फ़िल्म  देखते  हैं  तो  क्या  किसी  से  छुपकर  देखते   हैं  ।


जब  हम  उपरोक्त  कोई   भी  काम  करते  समय   किसी   से  छुपते   या  बचते  नहीं   है   तो   पोर्न वीडियो , ब्लू फिल्म , अश्लील वीडियो  आदि   देखते   समय  इस  बात  का  ध्यान  क्यों  रखते  हैं  कि  कहीं  कोई  हमें  देख   ना  ले  ।

क्यों कि..

हम  उसी  कार्य   को  स्वतंत्रता पूर्वक  और    पूरे   जोश – खरोश   के  साथ   करते  हैं  ।  जिसे  हमारा  चेतन   मन   स्वीकृति   दे   देता  है  ।  और   हमारा  चेतन  मन   उन्हीं  कार्यों  के   लिए  स्वीकृति  देता   है  ।  जिन   कार्यों  को   करने  के  सकारात्मक  संदेश उसे   अवचेतन  मन  से  प्राप्त  होते  हैं  ।  अब   यह अवचेतन { subconscious mind }  पर  निर्भर   करता   है , जैसी   छाप  अवचेतन   पर   पड़ी  होगी  वह  वैसे   ही   संदेश   चेतन   को  प्रसारित  करता  है  ।  यह  छाप  सकारात्मक  भी  हो   सकती  है और  नकारात्मक   भी ।

यह  छाप  कैसे  पड़ती  है ? ?

हमारा  अवचेतन   { subconscious mind } तमाम  जानकारियों ,  तथ्यों   और ज्ञान  का  भंडार  है  । और  उसे  यह  जानकारी   , तथ्य  और   ज्ञान   उसे   अपने  आसपास   मौजूद  सामग्री  ( टीवी , मोबाइल , अखबार  आदि ) और  अनुभवों  से  प्राप्त  होता  है  ।  इस  अवचेतन  रूपी  ज्ञान  के  भंडार   में  आपके  परिवार ,  आपके विद्यालय , अच्छे  – बुुरे  मित्र ,  संबंधी   आदि    से  प्राप्त   पोर्न    के   संबंध  में  सही  और  गलत   विचार और  जानकारियां  समय – समय  पर   अंकित  होते  रहते   हैं  ।आपका  अवचेतन  आपके  चतन  को  वही  जानकारियां  ,  संकेत  उपलब्ध  कराते   हैं  ।  और   चेतन   मन   शरीर   को  बताता   है   कि  क्या   प्रतिक्रिया  देनी  है  ।  उदाहरण  के   लिए   हमें   बचपन  में  सिखाया   जाता   है    कि  चोरी  करना गलत  है   इसलिए  जब   कभी   भी   हमने  अपने  जीवन   में   चोरी   को  अंजाम  दिया   होगा  तो   छुपकर  और  इस  डर  के   साथ  ही     दिया   होगा  कि  कहीं  कोई  देख  ना   ले ।  क्यों   कि  विभिन्न  माध्यमों  (  स्कूल , परिवार , अच्छे मित्र , शिक्षक  आदि )  से   हमारे  अवचेतन  में  ये  संस्कार  डाले  गए  हैं   कि  ये  गलत  है  और   इसके  परिणाम  भी बुरे   होंगे ।  इसीलिए   हम  बचते , छुपते  और  कोशिश  करते  हैं  कि  यह  काम करते  हुए   कहीं  किसी   की  नजर  में  ना  आये  । यही  बात  पोर्नोग्राफी  { Pornography } पर   भी  लागू  होती   है .. यही  वजह  है  कि  हम  जब  भी  किसी  तरह  की   अश्लीलता  का  नजारा  करते  हैं  तो  अपना   बचाव   करने   लगते   हैं  ।


अब  आते  हैं   मूल  बिंदु  पर  की  ..क्या  पोर्न  वीडियो / फिल्में  या  अश्लील  वीडियो  देखनी  चाहिए  ??


किसी  फिल्म   का   प्रसिद्ध   डायलॉग   है   “  दिल  लेफ्ट  में  होता  है   लेकिन  हमेशा  राइट  होता  है  ” (  यहां  पर  दिल   से  तात्पर्य  अवचेतन  मन  से  है ) जब  आपको  स्पष्ट  संकेत  मिल  गया  कि  यह  काम  गलत  है  तो  फिर  हमें  उस  कार्य  को करने  की  जरूरत  ही   क्या  है  ??

यहां   पर  लोग  तर्क  देंगे   कि  दो  – चार  बार   देखने  से  कुछ  नहीं  होता  जवानी  में  सब  चलता  है   !

ध्यान  देने  और  स्वयं  से   पूछने   करने   योग्य  बात  यह   है    कि  क्या  वह  3  या   4   बार    इस  तरह   का  नंगा  नाच  देखने  के   बाद  आप  अपने  आप  को  पांचवीं  बार   उसे  ना  देखने  से  रोक पाएंगे  ? ?
शायद  नहीं  !
यहीं  से   एक   गलत   आदत  का  जन्म  होता  है   जिसके  परिणाम   निम्नलिखित  हैं  –


पोर्न  वीडियो /  एडल्ट  फिल्में  देखने  के  क्या  नुकसान  होता  है  ?? | What is the harm of watching porn / adult movies ??


पोर्न  वीडियो या अश्लील   फिल्में   एक   तरह   का   धीमा  जहर  है   ।  यह  आपको  एकदम  से  नुकसान  नहीं   पहुँचाएगा  लेकिन   अपना  असर  पहली  बार  से  ही   आपके   दिमाग   में  छोड़ना   शुरु   कर  देगा  ।  इसके   नुकसान  इतने  भयानक  तक  हो  सकते  हैं    कि  जीवन –  पर्यंत   उनकी  भरपाई  भी  ना   हो  सके  ।

आइए  नजर  डालते   हैं   –


■ एडल्ट  वीडियो   वगैरा  देखने   का   सबसे   बड़ा   नुकसान   है  दिमाग  को  क्षति  पहुँचना  । यह  हमारी  याददाश्त { memory } , एकाग्रता { concentration } और   सोचने   की   क्षमता   को  प्रभावित   करता   है  ।   जिसका   असर   हमारे  जीवन  पर   पड़ता   है  । आप  स्वयं  सोचिए  अगर  आपके   हाथ  , पैर  ,  आंख  ,  जबान  ना   हो   तो   भी   आप  जीवन  में   बहुत   कुछ   कर  सकते   हैं  लेकिन  अगर   जानकारी   और   ज्ञान   का  भंडार  आपका   दिमाग  ही   क्षतिग्रस्त   हो  जाए    तो  आप    सिर्फ  एक  जीवित   लाश  बनकर   रहेंगे  । 


■ पोर्न  वीडियो / अश्लील वीडियो से भरी संबंधों   को   तार  –  तार  करने  में  भी  महत्वपूर्ण   भूमिका  निभाता  है  ।  इस  तरह  की   वीडियो  और   फिल्में  देखने   के   बाद   आप   उत्तेजित  होने  लगते   हैं  और   सेक्स  के   लिए  आतुर  होने  लगते  हैं ।  इस    स्तिथि   में  या   तो   आप  अनियंत्रित   रूप   से   कल्पना  करके  नाजायज  संबंधों  की  तरफ  कदम  बढ़ाने  लगते   हैं    या   फिर  हस्तमैथून { masturbation } करने  लगते  हैं ।  इससे आपकी  उस  ऊर्जा  का  क्षय   होने  लगता  है  जिसे  हम  दूसरे  महत्वपूर्ण   और  सकारात्मक   कार्यों   में  लगा   सकते   थे ।


■  शारिरिक  संबंधों   में  असंतुष्टि  के   भाव  आने  के   कारणों  में  एक  पोर्न  फिल्में  भी  होती  है  । 

कैसे  ? ?

आप  जो   भी   इस   तरह   की  फिल्में   देखते  हैं  तो  अपने  लिए  भी  यही  चाहने  लगते  हैं   कि  आपको  भी   एक  सुंदर   चेहरे , सुडौल  फिगर  वाला  पार्टनर  मिले  और   आपके   संभोग  का  समय   भी   वास्तविकता  { reality } से  कहीं  ज्यादा  हो  (  हम  ये  भूल  जाते   हैं  कि  अच्छा  दिखने  के   लिए   वे   मेकअप  और  संभोग   की   समयाविधि  बढ़ाने  के   लिए  विभिन्न  हानिकारक  दवाओं का  सेवन  करते  हैं  ,  जो  कि  किसी – किसी  के   लिए  जानलेवा  भी  साबित  हो  सकती  हैं  )  जब  हम  असल जिंदगी  में वह  सब  नहीं  पाते  हैं  तो  एक  असंतुष्टि  का   भाव  जन्म   लेता   है   जो   आगे   चलकर  तनाव  का   कारण  बनता  है  ।  और  यह  तनाव  संबंधों में  दरार  डालने  का  कार्य  करता है  जिससे  कई   बार   संबंध – विच्छेद ( तलाक ) तक   कि  नौबत आ  जाती  है ।


■  पोर्न वीडियो  / फिल्मों   के  प्रति   लगाव   समाज   से  अलगाव { isolation } ,   निराशा  और  अकेलेपन   की  तरफ   आकर्षित   करता  है   ।   इसका कारण   है  अश्लील  फिल्मों  को   देखने   की  लत  पड़   जाना  ।  मान  लीजिये  की आप  अपना  होमवर्क  कर  रहे   हैं  या  किसी प्रोजेक्ट   पर   तल्लीनता   से   काम  कर रहे  हैं  और   ऐसे   में  कोई   बीच – बीच  में  आकर  आपके   काम   में   बाधा  पहुंचा  है   या परेशान   करे   तो   आप   क्या   करेंगे   ?? 

आप  पर  चिड़चिड़ापन { irritability } हावी   होना  शुरू   हो  जाएगा ।   यह  चिड़चिड़ापन  गुस्से   को जन्म  देगा  और   गुस्सा  तनाव { stress } को  ।  आप   अस्त – व्यस्त  महसूस   करेंगे  और  अपना   काम   पूरा   करने   के   लिए   एकांत   ढूंढेंगे ।  यही   हाल   तब   होगा  जब  आप  पोर्न   की  लत  में  पढ़े  होंगे  ।  अगर   उस  समय  या  इस  संबंध  में   कोई   कुछ कहेगा  और   आपको इस  काम को   करने  से   रोकेगा   तो   आप  पर   बारी – बारी  चिड़चिड़ापन ,  गुस्सा  और   तनाव  हावी  होने  लगेगा  और  आप  अपने  इस  शौक   या  लत  को  अकेले  में  जाकर  पूरा  करेंगे ।  धीरे – धीरे  आप  अपने  आसपास   के माहौल   से ,  प्रिय  जनों   से  ,  मित्रों  से   कटना  शुरु  कर   देंगे  और   इन  सब  का  अंत  निराशा  के  जन्म  के   साथ   होगा ।


■ पोर्न वीडियो  / एडल्ट ( xxx ) फिल्में एक  नहीं  गलत फहमियों  को  जन्म  देता   है   इनमें   से  कुछ  निम्नलिखित   हैं –


●   आपने  अपने  जीवन  में   जितने   भी  पोर्न  फिल्में  देखी   हैं  उसमें  से  कितने  प्रतिशत  एक्स  एक्स  एक्स  ( XXX )  में  निरोध  का  प्रयोग  किया  गया   है  ।  और   आप  ,  कोई  किशोर  या  अधेड़  इस  तथ्य   से  क्या   सीख  लेते   हैं  ? ? शायद  यही  कि   निरोध  का  प्रयोग  करने   से   पूर्ण   संतुष्टि   नहीं  मिलती  यह  गलतफहमी   कई   रोगों  और   जनसंख्या  को बढ़ाने  में  मददगार है  ।


●  पोर्न  फिल्मों   में  दिखाया  जाता   है  कि  संभोग  की   अवधि   ४०   मिनट  से  एक  घंटे  तक   हो  सकती   है  जबकि वास्तविकता   से  हर  बुद्धिमान  परिचित  होता   है  ।


●  ज्यादातर  पोर्न   फिल्मों   में   दिखाया  जाता   है  ।  कि  ‘ हिंसा ‘   सेक्स  का  महत्वपूर्ण   हिस्सा   है  चीखने  ,  चिल्लाने , कराहने  के  बिना   संभोग  अधूरा  है  ।अतः  सेक्स  के  दौरान  अपने  पार्टनर   के  दर्द  की  परवाह  किए   बगैर  संभोग  करना  चाहिए चाहे   वह   प्राकृतिक   रूप   से   हो  या  प्राकृतिक  रूप  से  । दूसरे  शब्दों   में   पोर्नोग्राफी   का  शौकीन   व्यक्ति  महिलाओं  , लड़कियों  और  यहां  तक   कि बच्चों  को  भी   इंसानी  नजरिये   से  नही  देखता  और  उनका  यौन – शोषण  करने  से  भी  पीछे  नही  हटता ।


●  ज्यादातर   पोर्न   फिल्मों   के  किरदार   पड़ोसी ,  शिक्षक , सौतेले  भाई  ,  बहन या   भाभी  आदि  होते   हैं ..   और   इन  किरदारों  के   बीच  बनने  वाले  शारिरिक  संबंधों   को  इतने  लुभावने  अंदाज  में  दिखाया   जाता  है   की   ऐसा  प्रतीत  होता   है   जैसे  यह  किरदार यह   संदेश   देते   हैं  की   संस्कार  वगैरह  कुछ  नहीं   होते  ।   सेक्स  की  भावना  सभी  में  है  । अतः   रिश्तो  को  अमर्यादित  करके  अवैध  संबंध  बनाना  जायज   है  ।  इसी  घटिया  मानसिकता  के  कारण   परिवार   ,  समाज  और  व्यक्ति  पहले   दूषित  और  फिर  नष्ट  होते  हैं ।

●  लिंग  की   लंबाई  ,  चौड़ाई  ज्यादा  होनी  चाहिए  ।  ये  मर्दानगी  की   निशानी   है  आदि ।


■  पोर्न  वीडियो  यौन हिंसा  और   अपराध   के  लिए भी  काफी  हद  तक जिम्मेदार  है  ।  एडल्ट  फिल्में  महिला  और  पुरुष  को  मिलने   वाली   उचित  यौन   शिक्षा   में   सबसे   बड़ी    बाधा   है  ।  उचित   यौन  शिक्षा   के   अभाव   में  स्त्री   के   लिए   पुरुष  के  और  पुरुष  के   लिए  स्त्री   के   गुप्तांग   या  जननांग  आकर्षण  के   केंद्र बन   जाते   हैं  और   दिमाग  को   कुछ  नया एवं  उपयोगी  सोचने  के बजाय  उसी  विषय  पर   सोचते   रहने  पर    केंद्रित   करते  हैं  ।अब  अगर  आपका  दिमाग  अच्छी  शिक्षा   ग्रहण   करेगा   तो  आपके  कार्य  स्वतः   ही  अच्छे   होंगे  किंतु  दिमाग के केंद्र  में  अश्लीलता  ही   विराजमान  होगी  तो   कार्य  और   फिर   उसके  परिणाम भी   बद  से  बदतर   ही   होंगे । पोर्न  का  आदि  बन   जाने   के  बाद  व्यक्ति   का  नजरिया  सेक्स  को   लेकर  विकृत   हो   जाता  है   और   यह   विकृत  नजरिया  समाज   में  बलात्कार   और  यौन   हिंसा   एवं   उत्पीड़न   के  लिए  महत्वपूर्ण   कारण  बनता   है ।

पोर्न वीडियो से होने वाले नुकसान में एक है हिंसा
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पोर्न  से   होने वाले  नुकसान   या   हानियों  की   सूची  बहुत  लंबी  है  ।  मैंने  सिर्फ   कुछ  प्रमुख   कारणों  को  सूचीबद्ध   किया   है  ।  अब   सवाल  उठता   है  कि  अगर  यह  चीज  इतनी  नुकसानदायक  है  तो  हम  इस  पर   काबू   कैसे  पा  सकते  हैं  । नजर  डालते   हैं   इसकी  रोकथाम  और  इससे   बचने  के  उपायों   पर ।


पोर्न  वीडियो /  एडल्ट  फिल्मों  को  देखने  की  लत  कैसे  छोड़े  : – | How to quit watching porn / adult movies : –


अंग्रेजी   में   एक   कहावत   है   “ precaution is better then cure ” ” एहतियात  इलाज़  से  बेहतर  है  ” इससे  पहले  की  आदत   आपको  अपनी  गिरफ्त  में   लेकर   एक  मानसिक   रोगी  बनाए  समय  रहते  इसे  लेकर  जागरूक   होना  एवं  जागरूकता   फैलाना  सबसे  महत्वपूर्ण  कदम   है  ।


कुछ  उपयोगी  उपाय  निम्नलिखित  हैं  : –


ध्यान   इस   बला  से   मुक्ति   पाने  का   श्रेष्ठ  माध्यम   है  ।  किसी   योग्य  शिक्षक  से  अपनी  परेशानी  साझा   करके  अपने  व्यक्तित्व  के  अनुसार   कोई  ध्यान  पद्धति  चुनिए  और  पूरी  ईमानदारी   से  उसका  अभ्यास  कीजिए   ।  आप बहुत  जल्द अच्छा  महसूस  करेंगे  ।

ध्यान सहयोगी है


◆ पोर्न  देखने  का  सबसे  सरलतम  माध्यम   है  इंटरनेट  और   इंटरनेट  से  जुड़ने  का  सबसे  सरल  माध्यम   है  स्मार्टफोन , लैपटॉप  आदि  ।   अगर  आप  इसके  आदी   बन  चुके  हैं   तो  पोर्न  से  निजात  पाने   के  लिए   पहला  कदम   उठाइए  और  पोर्न  वेबसाइट  को  ब्लॉक  कर   दीजिए  ।  जिन्हे   आप  देखते  आ  रहें   थे    तथा   उनमें  एंटी   पोर्न  सॉफ्टवेयर   भी  डाल दीजिए  जिससे  कभी  इनसे  संबंधित   विज्ञापन   भी   आपके   सामने   ना  खुले ।


◆ अगर  आपने  एडल्ट  वीडियो  या  पोर्न  सामग्री को  फोन  गैलेरी  ,  पेन  ड्राइव , हार्ड डिस्क  आदि   में  जहां  भी  सेव   कर  रखा   है   वहां   से   डिलीट  कर  दीजिए  और  रिसाइकल  बिन   में  जाकर   भी   हटा   दीजिए  ।


अश्लील  सहित्य  या   पोर्नोग्राफी  से  संबंधित   छवियों   को  जो  आपको  उत्तेजित  करती  हो , पढ़ने  और  देखने   से  बचिए ।


◆ पोर्न  देखने  के   अलावा   अगर आपकी   कुछ   और   शौक   हो   तो   उन   पर   ध्यान  दीजिए ।  कुछ  नया   सीखे   जो   आपको रचनात्मक   बनाए   यह  प्रकृति   से   जोड़े   ।  डांस   ,   पेंटिंग   ,  खेल   –  कूद   आदि    कुछ   अच्छे  उपाय  हो   सकते   हैं   कहने   का तात्पर्य   है   स्वयं   को   व्यस्त   रखें   जिससे  आपको   ध्यान  उस  तरफ  न  जाए ।


◆ अपने   परिवार  और  शुभचिंतकों    के   साथ  समय   बिताएं   ।  हम  हमेशा  दुनिया   पर  ध्यान   देते   हैं   ,  लेकिन   जब  बात अपने   परिवार  की   आती  है  तो   “  घर  की  मुर्गी  दाल  बराबर  ”   यही  बात   हो   जाती   है  ।   यह  न  सिर्फ   आपका अकेलापन   दूर   करेंगे   बल्कि   इस  लत   से   बाहर  निकलने   में आपकी   सहायता  भी  करेंगे ।


दोस्तों ..


सेक्स   एक  भावनात्मक   जुड़ाव { Emotional connection }   है  । यह  प्रेम जताने   और  नए  भौतिक  शरीर  को   जन्म  देने  में  सहायक  होता  है  ।  लेकिन पोर्नोग्राफी  इस  प्रकृति प्रदत्त  भावनात्मक  जुड़ाव  को  एक  घटिया और विकृत  मानसिकता   में   बदल   देता  है  । यह   बेहद   दुख   की  बात है   कि   मनुष्यों  का   एक   समूह   धन कमाने   के  लालच  में  इतना गिर  जाता   है कि  अश्लील  फिल्मो   के  निर्माण और  उनमें   काम  करने   को  ही  अपना  पेशा  बना  लेता  है ।  जिसके  नकारात्मक   परिणामों   का   भुगतान  ज़्यादातर  निर्दोष  लोग   करते है । 


अतः   सकारात्मक   रहे  एवं   सकारात्मकता  बाटें ..


उम्मीद   है  कि   आपको  ये  लेख  पसंद  आएगा  ,  और  अगर  आप  या  आपका  कोई   परिचित  इस  लत  से  ग्रस्त  है  तो उसकी  सहायता  करेगा ।हर  बार   की   तरह  इस  बार  भी  शिकायतों  और  सुझावों  का  इंतजार  रहेगा ।


धन्यवाद .

😊

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