“ लोग क्या कहेंगे ” डर से पाएं मुक्ति !

“ लोग क्या कहेंगे ” डर से पाएं मुक्ति !

लोग क्या कहेंगेलोग क्या कहेंगे

 “ लोग क्या कहेंगे ” कभी – कभी हम अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले सिर्फ इसलिए बदल देते हैं ।

जो एक ऐसी समस्या है जिससे हम में से ज्यादातर लोग कभी ना कभी जीवन में दो – चार होते हैं कुछ उबर जाते हैं और कुछ अटक जाते हैं ।  जो उबर जाते हैं जीवन में नए मुकाम हासिल करते हैं और जो अटक जाते हैं वे अपनी उन्नति में स्वयं बाधक बनते हैं ।

स्कूल , कॉलेज जाने की उम्र से लेकर दादा , दादी बनने की उम्र तक हमें समाज में अपने साथियों के साथ तालमेल बनाकर चलना होता है । क्योंकि हम सामाजिक प्राणी है । लेकिन इस तालमेल में मिठास बनी रहे इसके लिए हम कभी – कभी दूसरों को अपनी भावनाएं आहत करने का अधिकार भी दे देते हैं । यह सोच कर कि अगर मैं यह करूं या मैं वह करूं तो लोग क्या कहेंगे

क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे क्या कारण है ?

दरअसल हम यह चाहते हैं कि सामने वाला व्यक्ति हमें हर हाल में पसंद करें हमारे फैसले , राय और विचारों का सम्मान करें .. और युवा वर्ग इस परेशानी से सबसे ज्यादा जूझता है क्योंकि युवावस्था एक ऐसी अवस्था  होती है जब हम अपनी छवि को लेकर सबसे ज्यादा सजग  और चिंतित रहते हैं । सबके लिए सम्मान एवं प्रेम पूर्ण व्यवहार रखना अच्छी बात है । यह आपके व्यक्तित्व का अहम हिस्सा भी है लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं होना चाहिए कि आप सामने खड़े व्यक्ति को प्रसन्न रखने की इतनी कोशिश करें कि आपके सामने अपने आत्मसम्मान  से समझौता करने की नौबत आन पड़े ।


क्या करें : –

‘ लोग क्या कहेंगे ‘ समस्या को समझें   अपने जीवन में हम अनेक लोगों से मिलते हैं  इन अनेकों   में हमारे  यार , दोस्त , रिश्तेदार आदि लोग आते हैं इनमें से कुछ लोगों से हम बेहद प्रभावित होते हैं  ।  हम उनके जैसा ही बनने  { कपड़े पहनने , बात करने , हाव – भाव आदि } की  कोशिश करते हैं । इसके साथ – साथ  हमारे  हर  संभव  प्रयास   रहते  हैं कि हम अपने आदर्श , चहेते व्यक्ति को प्रभावित करें बस यही से समस्या शुरू हो जाती है । हमारे निर्णय लेने की छमता प्रभावित होने लगती है .. हम यह नहीं समझ पाते कि हमारे लिए क्या बेहतर है । परिणाम स्वरूप जब हम बड़े होने लगते हैं और कोई महत्वपूर्ण फैसला लेना चाहते हैं तो हमें परिवार का वह सहयोग नहीं मिलता जिसकी अपेक्षा हम उनसे करते थे । इसका कारण है .. हमारे रूप में परिवार एक आज्ञाकारी पुत्र / पुत्री को देखता है जो उनकी हर बात को आसानी से मान लेता है । ऐसे में वे संबंध जिन्हें लेकर हम स्पष्ट होते थे कि वे हमारी बात मानेंगे वे संबंध भी बदल जाते हैं ।


इस समस्या से निजात कैसे पाएं

‘ लोग क्या कहेंगें ‘ जैसा कि हम विश्लेषण करने पर पाते हैं कि इस समस्या के तार हमारे शुरुआती जीवन से जुड़े होते हैं ।  अब हम अतीत में जाकर उनमें सुधार नहीं कर सकते लेकिन वर्तमान में लिए गए हमारे कुछ निर्णय हमारी इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं और शायद खत्म भी ।


आइए जानते हैं कैसे : –

स्वयं के भीतर झांके

जैसा मूल्यांकन आप दूसरों का करेंगे वैसा ही मूल्यांकन आपका भी किया जाएगा । यह मानव का स्वभाव है .. हम सभी के भीतर बुराइयां हैं लेकिन हमें दूसरों की बुराइयां ही नजर आती हैं चाहे हमारे स्वयं के जीवन में उथल – पुथल मची हो लेकिन हम दूसरों को सहज रहने का ज्ञान देने से नहीं हिचकते या  चूकते हैं । अपने भीतर जाकर जब हम अपने अवगुणों को स्वीकारना सीख जाते हैं तो दूसरों के बारे में अनावश्यक सोचना और राय बनाना बंद कर देते हैं .. और जब हम दूसरों का मूल्यांकन बंद कर देते हैं तो वह हमारे बारे में क्या सोचेंगे यह   हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं रह जाती । क्योंकि हम बुनियादी तथ्य समझ जाते हैं कि हम सभी में अच्छे और बुरे चरित्र होते हैं और हम सभी को निरंतर सीखने और सुधार करते रहने की आवश्यकता होती है ।

अपनी संगति सुधारे

अगर आपके पास दस किलो मिठाई है और आपसे कहा जाए कि आपके पास जो कुछ भी है उसे दूसरों के साथ बांटिये  तो आप क्या बाटेंगे ?? 

जाहिर है मिठाई !

क्यों ??

क्योंकि इस पर वही चीज आपके पास बांटने योग्य है ।   यही सच्चाई है ..  जिसके पास जो होता है वह वही अपने आसपास के लोगों में बांटता है  । अगर आप ऐसे व्यक्ति की संगत में रहना पसंद करते हैं जिसका दिल और दिमाग नकारात्मकता {  लालच ,  घृणा , नफरत ,  क्रोध आदि } से भरा हुआ या घिरा हुआ रहता है तो वह आपको क्या देगा ?? 

जाहिर है नकारात्मकता !

‘ लोग क्या कहेंगे ‘ या  ‘ लोग क्या सोचेंगे ‘ जैसे वाक्यों को अत्यधिक महत्व देने वाले लोगों को चाहिए कि प्रसन्न एवम सकारात्मक लोगों की संगति का चुनाव करें । जो न सिर्फ आपको आपके लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रोत्साहित करें बल्कि दूसरे व्यक्तियों के सकारात्मक पक्ष की ओर आपका ध्यान ले जाये । इससे क्या होगा ??

{1} आप नकारात्मक बातों से दूरी बनाना शुरू कर देंगे ।

{2} आपके आत्मविश्वास और आत्मसम्मान में वृद्धि होगी ।

{3} आप हर व्यक्ति में अच्छाइयां ढूंढने की शुरुआत करेंगें ।

अगर आपको यह महसूस होता है कि आप अपने आस – पास मौजूद नकारात्मक मानसिकता वाले व्यक्तियों से बचने में असमर्थ है तो ऐसे लोगों के व्यवहार को अपनी ऊर्जा देना बंद करे { उनके व्यवहार पर ज्यादा ध्यान न देकर और अन्य लोगों के साथ उनके व्यवहार या रवैये पर चर्चा न करके } जल्द ही आप अपनें आप को ऐसे लोगों की संगत से दूर पाएंगे । और धीरे – धीरे इस बात पर भी ध्यान देना कम और फिर बन्द कर देंगें की लोग आपके विषय में क्या कहेंगे या क्या सोचेंगे ।


हर बात पर हां कहने वाला व्यक्ति ना बनें  

अक्सर हमारे कुछ क़रीबी { दोस्त , रिश्तेदार , माता – पिता आदि } या खुद हम अपने फैसले दूसरों पर थोपना चाहते हैं । लेकिन वास्तविकता यह है कि अपने अच्छे और बुरे भविष्य के लिए वर्तमान में लिए गए आपके स्वयं के फैसले से बेहतर कुछ नहीं होता , बशर्ते वह सोच , समझ कर लिए गए हो । जब यह फ़ैसले थोपने  वाली परिस्थितियां बनती हैं तो संबंधों में कड़वाहट आती है .. इस कड़वाहट से बचने के लिए हम कई बार ऐसी बातों या कार्यों के लिए हां कर देते हैं और सहमति प्रकट कर देते हैं … जो हमारे अनुसार उचित नहीं होती हमें ऐसा लगता है कि ऐसा करने से सामने वाला हम हमसे खुश रहेगा ।  एक बात अच्छी तरह समझ ले कि आप कितनी भी कोशिश कर ले आप सभी को खुश नहीं रख सकते इसलिए दूसरे लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने से अच्छा है आप अपनी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करें अगर आप ऐसा नहीं करेंगे और हर व्यक्ति को प्रसन्न रखने की कोशिश करते रहेंगे तो आपको कई बार ना चाहते हुए भी उनके कार्यों या बातों के लिए हामी भरनी पड़ेगी या सहमति देनी होगी हो सकता है कि आपका वही करीबी यह जताने की कोशिश करें कि वह आपके लिए आपसे या किसी और से ज्यादा बेहतर फैसले ले सकता है लेकिन इसके पीछे यही धारणा काम कर रही होती है कि आप हमेशा हर बात पर हां करने वाले व्यक्ति हैं इस जंजाल से बाहर आएं और अपने आत्मसम्मान एवं आत्मविश्वास को स्वयं छलनी ना करें । इसे समझे  की आपकी प्रसन्नता दूसरों की   पसंद या नापसंद पर निर्भर नहीं है । हां … ऐसा करते समय ध्यान रखें कि आपके कारण किसी को कष्ट न पहुंचे । कभी भी भावनात्मक रूप से मूर्ख ना बने ना बनाएं .. याद रखिए हमें सभी का सम्मान जरूर करना है सभी को साथ लेकर जरूर चलना है लेकिन अगर कभी आवश्यकता पड़े तो किसी और से प्रभावित हुए बगैर अपने लिए गए निर्णय लें । जब आप धीरे – धीरे बुद्धिमत्तापूर्ण इसका अभ्यास करेंगें तो कुछ समय बाद आप पाएंगे कि ‘ लोग क्या कहेंगे ‘ या क्या सोचेंगे पर आप ध्यान देना बंद कर देंगे । 

लोग क्या कहेंगे


दोस्तों ..

यहां लिखी गयी बातें और तथ्य सिर्फ कागज काले करने के उद्देश्य से नहीं लिखी गयी हैं .. मैं स्वयं इस समस्या से ग्रसित था .. और इस बीमारी ने जो तकलीफें दी है उनकी व्याख्या यहां संभव नहीं लेकिन इससे निजात पाने के लिए मेरे द्वारा जो भी कार्य किये गए थे उनका वर्णन ऊपर दिया गया है .. कुछ प्रसिद्ध लेखकों की किताबें और कुछ प्रसिद्ध प्रेरणादायक ब्लॉग मेरे लिए मददगार सिद्ध हुए .. और अगर कहीं यह लेख किसी की सहायता कर पाए तो ये हमारे लिए बेहद सम्मानजनक बात होगी । सफलता के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए हमसे जाने – अनजाने गलतियां हो जाती हैं ।  यह गलतियां हमें सिखाती भी हैं कि हम कहां चूक गए थे लेकिन इन गलतियों के बारे में सोचते रहना और उन्हें सुधारने के लिए कोई ठोस कदम ना उठाना हमारी आंतरिक शक्तियों जैसे आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति को कमजोर बनाता है यही कमजोरी इस सोच को जन्म देती है कि .. ‘ लोग क्या कहेंगे ‘      


हमें उम्मीद है कि आप उपरोक्त तथ्यों को समझकर     ‘ लोग क्या कहेंगे ‘  जैसे रोग से हमेशा के लिए मुक्ति पाएंगे और दुगुने उत्साह से अपने जीवन को जियेंगे । और हमेशा की तरह इस बार भी आप की शिकायतों और सुझावों का इंतजार रहेगा ।


धन्यवाद 

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