महात्मा गांधी | MAHATMA GANDHI

महात्मा गांधी | MAHATMA GANDHI

महात्मा गांधीमहात्मा गांधी

“ मौन सबसे सशक्त भाषण है .. धीरे-धीरे दुनिया आपको सुनेगी ” – महात्मा गांधी 

मोहनदास करमचंद गांधी एक ऐसा गांधी जिन के विषय में हम सभी ने पढ़ा, सुना और कुछ भाग्यशाली लोगों ने देखा भी होगा ।

एक ऐसा गांधी जिनका जिक्र किए बगैर परतंत्र भारत से स्वतंत्र भारत तक की दास्तान अधूरी है ।

एक ऐसा गांधी जिन्होंने सत्याग्रह का सही अर्थ समझाया उनके अनुसार – सत्याग्रह और कुछ नहीं अन्याय के खिलाफ एक अहिंसक लड़ाई है ।

हम बात कर रहे हैं … राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की । जिनकी जयंती अक्टूबर माह की 2 तारीख को प्रतिवर्ष मनाई जाती है । और इस बार हम उनकी 151 वी जयंती मना रहे हैं । भारत की वर्तमान स्थिति को देखकर कुछ लोग महात्मा गांधी पर कीचड़ भी उछालते हैं । तथा उन्हें आजादी के समय हुए विभाजन के लिए जिम्मेदार भी ठहराते हैं । वहीं कुछ लोग उनके विषय में सकारात्मक राय रखते हैं । तथा वे मानते हैं कि स्वतंत्रता उनकी सक्रियता और दूरदर्शिता के बिना असंभव थी । महात्मा गांधी अपने आप में इतने विलक्षण व्यक्तित्व थे कि उन पर कई किताबें लिखी जा चुकी है । और कई फिल्में भी बन चुकी हैं । जो उनके दोनों सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष पर प्रकाश डालते हैं । लेकिन जितना हमें ज्ञात है या जितना हमने पढ़ा और सुना है  । क्या उससे इतर भी कुछ है ??  जिस पर रोशनी पढ़नी चाहिए आइए जानने की कोशिश करते हैं – 

महात्मा गांधी का जीवन परिचय 

आजादी से 78 वर्ष पहले 2 अक्टूबर  1869 करमचंद उत्तमचंद गांधी के घर में एक बालक का जन्म हुआ । कौन जानता था कि यह बालक आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेता के रूप में उभर कर सामने आएगा और जिसे आने वाली शताब्दीया महात्मा गांधी और बापू के रूप में याद करेगी । महात्मा गांधी के पिता ने चार विवाह किए थे । कारण था उनकी पत्नियों का एक के बाद एक के बाद एक का निधन होना । मोहनदास करमचंद गांधी अर्थात महात्मा गांधी अपने पिता की  चौथी पत्नी पुतलीबाई से जन्मी चार संतानों में सबसे छोटे थे । यह उस दौर की बात है जब वयस्क होने तक प्रतीक्षा करने की अपेक्षा बाल्यावस्था में ही विवाह कर दिया जाता था । जिसे बाल विवाह भी कहा जाता था । मोहनदास के साथ भी यही हुआ । और 13 वर्ष का मोहनदास और लगभग 14 वर्ष की कस्तूरबा बाई मकनजी विवाह के बंधन में बंध गए । तथा कुछ वर्षों पश्चात  वे दोनों चार पुत्रों हरीलाल गांधी , मणिलाल गांधी , रामदास गांधी और देवदास गांधी के माता-पिता बने । 4 सितंबर 1888  के दिन वे 18 वर्ष की आयु में कानून की पढ़ाई करने के लिए अनुमानतः 5000 की छात्रवृत्ति मिलने पर समुद्री मार्ग से लंदन रवाना हुए । लंदन में युवा मोहनदास को पश्चिमी सभ्यता ने कुछ समय के लिए आकर्षित भी किया । जिस से प्रभावित होकर उन्होंने फ्रांसीसी सीखने , नृत्य सीखने और फिर वाइलेन सीखने का अभ्यास किया । लेकिन कुछ समय बाद उन्हें यह कृत्य निरर्थक महसूस होने लगे ।

कहते हैं कि “ जैसा देश वैसा भेष ” लंदन में रहते हुए गांधी जी ने भी गोरों की कुुुछ बातें अपनानी शुरू कि । वे वहां की वेजिटेरियन सोसाइटी के सदस्य बने और उन्होंने भारत से आने वाली मिठाइयों और विभिन्न मसालों का इस्तेमाल बंद कर दिया । हालांकि शराब परोसे जाने पर उन्होंने स्पष्ट रूप से मना कर दिया ।

महात्मा गांधी के भारत वापसी के बाद लगभग दो वर्ष से भी कम समय तक उन्होंने मुंबई में वकालत की । लेकिन आंशिक सफलता मिलने के बाद वे दक्षिण अफ्रीका में स्थित दादर अब्दुल्ला एंड कंपनी जो कि एक कानूनी फर्म थी , में कार्य करने लगे ।

दक्षिण अफ्रीका में उन्हें टी टी द्वारा ट्रेन के पहले दर्जे का टिकट होने के बाद भी तीसरे दर्जे में सफर करने के लिए कहना और इंकार करने पर ट्रेन से बाहर फेंक दिये जाने से लेकर अदालत में पगड़ी पहन कर आने पर डरबन की अदालत के न्यायाधीश द्वारा फटकारे जाने तक जैसी कई घटनाएं हुई जहां उन्हें भारतीयों के साथ हो रहे भेदभाव का सामना करना पड़ा । हालांकि जहां तक संभव था महात्मा गांधी द्वारा विरोध किया गया जैसे – न्यायाधीश द्वारा अदालत में पगड़ी उतारने को कहने पर यह कहकर ना उतारना की पगड़ी पहनना हिंदुस्तानियों के सम्मान का प्रतीक है । अतः वे इसे नहीं उतारेंगे यह घटनाएं बाद में एक बड़े बदलाव का कारण बनी ।

दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने पर उन्होंने जो महत्वपूर्ण कार्य  या उपलब्धि सर्वप्रथम हासिल की । वह था चंपारण और खेड़ा सत्याग्रह । जमीदारों द्वारा घोषित किए गए ग्रामीणों एवं किसानों की स्थिति बदतर हो चली थी । वह अंग्रेजों द्वारा लगाए जा रहे लगान और अत्याचारों से पीड़ित थे । महात्मा गांधी उनका अधिकार उन्हें वापस दिलाने का बीड़ा उठा चुके थे । एक किसान की प्रार्थना पर वह पहले पटना और फिर मुजफ्फरपुर गए ताकि वह घटना की वास्तविकता जान सके कि अंग्रेज वहां क्या जुल्म ढा रहे हैं ?

“ एक व्यक्ति जांच करने इतनी दूर आया है तो उसका साथ देने में कोई बुराई नहीं ” यह बात वहां के कुछ प्रतिष्ठित वकीलों के दिमाग में आई । चंपारण में जो वकील उनसे मिलने आए थे उनमें से एक थे राजेंद्र प्रसाद वह प्रतिष्ठित वकील थे । जो कुछ समय गांधी जी के साथ चंपारण में भी रहे । खेड़ा में गांधी जी को एक और विलक्षण सहयोगी मिले सरदार बल्लभ भाई पटेल

गांधी जी ने किसानों को सत्याग्रह का अर्थ एवं महत्व समझाया । यह इसी का परिणाम था कि जिस से अंत में किसान विजय हुए । इस तरह के सत्याग्रह कार्यक्रमों के बाद गांधीजी न सिर्फ लोकप्रिय  हुए बल्कि लोगों को यह भी समझ आया की अहिंसक दृष्टिकोण कितना शक्तिशाली हो सकता है । मार्च 1930 में गांधी जी द्वारा दांडी मार्च शुरू किया गया । करीब 200 मील लंबी यात्रा के उपरांत उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाया गया नमक ना बनाने का कानून तोड़ दिया था । जो नमक सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है । भारत लौट आने के बाद गांधीजी समय-समय पर ऐसी घटनाओं का हिस्सा बने जिन्होंने उन्हें अंग्रेजी हुकूमत के लिए एक बड़ा खतरा और स्वतंत्रता की प्यासी जनता के लिए एक अहिंसक किंतु सत्य के मार्ग पर चलने वाला सशक्त नेतृत्वकर्ता की छवि प्रदान की ।

अब समय था द्वितीय विश्व युद्ध के प्रारंभ का और भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध भारत छोड़ो आंदोलन के प्रारंभ का 9 अगस्त 1942 को गांधी जी के आह्वान पर पूरे भारत में एक साथ प्रारंभ हुआ भारत छोड़ो आंदोलन । भारत छोड़ो का नारा जिस स्वतंत्रता सेनानी ने दिया था उनका नाम था युसूफ मेहर अली । गांधी जी इस  आंदोलन में ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार हुए । लेकिन अन्य स्वतंत्रता सेनानियों एवं युवाओं ने इस ज्वाला को बुझने नहीं दिया सरकार स्वतंत्रता के लिए की जा रही कोशिश को खत्म करने की असफल कोशिश किए जा रही थी जिसके परिणाम स्वरूप लगभग 1 वर्ष का समय लगा तब कहीं जाकर वे इस विद्रोह को दबा पाए । इस आंदोलन में अनुुुमानताः 940 लोगो की मृत्यु हुई और लगभग 1650 व्यक्ति घायल हुए ।

स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1947 के दिन गांधीजी कोलकाता में थे । तथा 24 घंटे के उपवास पर थे । वह स्वतंत्रता मिलने से प्रसन्न थे लेकिन इस बात से आहत भी थे कि उनका देश विभाजित हो गया था । हिंदू और मुस्लिम एक – दूसरे के रक्त के प्यासे हो गए थे । गांधीजी ने दोनों समुदायों से शांति और प्रेम बांटने का आह्वान भी किया और अंततः 30 जनवरी 1948 का वह दिन भी आया जो भारत के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में सदा के लिए जुड़ गया । इस दिन नाथूराम विनायक गोडसे जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पूर्व सदस्य भी था ने गोली मारकर हत्या कर दी , और जनमानस को अहिंसा का मार्ग दिखाने वाला एक कुशल नेतृत्वकर्ता हमेशा के लिए चिरनिद्रा में सो गया । 

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी जी के विषय मैं ऐसे बहुत से तथ्य हैं जिनके बारे में आज के युवा को जानना चाहिए । क्या है वह तथ्य आइए जानते हैं : –

जो सलाह दूसरों को देते उसे पहले स्वयं पर प्रयोग करते :- 

गांधीजी उपदेश के बदले आचरण में गहन विश्वास रखते थे । चपारण में जब वे किसानों के अधिकार के लिए लड़ रहे थे तो उनके साथ कुछ वकील भी वहां रह रहे थे । क्योंकि वह सारे वकील जात – पात और छूत – अछूत  में विश्वास रखते थे , सिर्फ ब्राह्मण रसोइए के हाथ का बना हुआ खाना ही खाते थे तथा कपड़े धुलवाने के लिए धोबी को बुलाते थे और अगर  धोबी सप्ताह भर नहीं आते तो उन्ही गन्दे  कपड़ों में घूमते थे । गांधी जी को यह बात अखरती थी । एक दिन उन्होंने अपने कपड़े धोने शुरू किए और साथ ही वकीलों को कहा कि वह चाहे तो अपने गंदे कपड़े भी उन्हें दे सकते हैं वे उन्हें भी धो देंगे । यह सुनकर वहां खड़े वकील बहुत लज्जित हुए और उन्होंने कपड़े धोने के लिए धोबी का इंतजार करने की अपेक्षा अपने कपड़े स्वयं धोने प्रारंभ किए । भोजन को लेकर भी उन्होंने सब को स्पष्ट कहा था कि जब बड़े – छोटे सबका एक ही लक्ष्य है तो भोजन में जात पात कैसी है ?? इसके उपरांत वहां एक सामूहिक भोजनालय प्रारंभ हुआ जिसकी जिम्मेदारी गांधी जी की पत्नी कस्तूरबा जी ने ली । उसके बाद वहां भोजन कौन पकायेगा इस बात को लेकर कोई परेशानी नहीं हुई । जैसा भी भोजन जिसके भी द्वारा बनाया जाता सभी के द्वारा प्रेम – पूर्वक ग्रहण किया जाता था । कस्तूरबा जी की सहायता के लिए वहां दुर्गाबेन देसाई और मणिबेन पारिख उपस्थित रहती थी ।

एक पत्रकार के रूप में गांधीजी

1903 ईस्वी में गांधी जी द्वारा एक अखबार का भी प्रकाशन शुरू किया गया था । इस अखबार का नाम था इंडियन ओपिनियन मनसुखलाल नागर इसके पहले संपादक थे । इंडियन ओपिनियन में दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों को हो रहे भेदभाव की समस्याओं का वर्णन होता था । इंडियन ओपिनियन का प्रकाशन शुरुआत में गुजराती , हिंदी , अंग्रेजी एवं तमिल में होता था । इसके साथ-साथ गांधीजी ने चाहे वह सत्याग्रही नामक पृष्ठ का बुलेटिन हो या यंग इंडिया हरिजन आदि में प्रकाशित होने वाले लेख हो उन्होंने हर जगह सदैव पत्रकार के रूप में अपनी छाप छोड़ी और जागृति फैलाई ।

गांधीजी और सत्याग्रह के विभिन्न रूप

दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के लिए प्रयोग किया गया सत्याग्रह भविष्य में गांधीजी के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गया । भारत वासियों ने समय-समय पर गांधी जी के मार्गदर्शन में सत्याग्रह को विभिन्न रूपों में देखा , जाना और सदैव पहले से अधिक शक्तिशाली पाया । गांधी जी के अनुसार ..

■ किसी भी स्थिति में अन्याय को स्वीकार नहीं करना चाहिए ।

■ सत्याग्रह अन्याय के विरुद्ध एक अहिंसक लड़ाई है सत्याग्रह बदला लेने सामने वाले को सजा देने के लिए नहीं हो सकता ।

■ सत्याग्रह में विरोध अन्याय करने वाली व्यवस्था  का होना चाहिए अन्याई व्यक्ति का नहीं ।

गांधी जी की प्रिय पुस्तक

गांधी जी एक अच्छे पाठक थे । तथा अपने जीवन काल में उन्होंने कई पुस्तकें पढ़ी । उनमें से कुछ पुस्तकें उन्हें बेहद प्रिय थी । लेकिन मैं यहां सिर्फ एक पुस्तक का उल्लेख करुंगा जिसके विषय में कहा जाता है कि इस पुस्तक ने उनके जीवन को न सिर्फ एक सकारात्मक रुख ,  एक दिशा दी  वरन डरबन के नजदीक एक फिनिक्स बस्ती को बसाने के लिए प्रेरित भी किया ” अंटू दिस लास्ट ” एक अंग्रेज लेखक रस्किन की रचना थी । जिससे गांधी जी इतने प्रभावित थे । कि उन्होंने 1908 मेँ  ‘ सर्वोदय ‘ नाम से इस पुस्तक का गुजराती भाषा में अनुवाद भी किया । इस पुस्तक के अनुसार – वकील हो या बाल काटने वाला नाई , दोनों की कार्य का मूल्य समान है । क्योंकि एक व्यक्ति का हित सभी के हित में निहित है ।

दोस्तों ….एक पोस्ट में गांधीजी का जीवन विवरण देना असंभव है फिर भी मेरा छोटा सा प्रयास आपके सम्मुख है । दुनिया में संपूर्ण कोई नहीं होता निश्चित ही महात्मा गांधी  जी के कुछ नकारात्मक पहलू भी होंगे प्रशंसक उनके इस पहलू को नजरअंदाज करेंगे और आलोचक इस पहलू को उजागर । गांधी जी ने अपने विचारों के माध्यम से विश्व को एक नए दर्शन से परिचित कराया है । अगर आज का युवा उनका 20% भी अपने जीवन में उतार पाए तो निश्चित ही शारिरिक हो या मानसिक , आध्यात्मिक हो या सामाजिक , पारिवारिक हो या भावनात्मक हर युद्ध में विजय होगा ।

उम्मीद है .. महात्मा गांधी जी पर यह पोस्ट आपको पसंद आएगी आपके सुझाव व शिकायतें हर बार की तरह इस बार भी आमंत्रित हैं । 

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