पल पल बदलता पर्यावरण ..

पल पल बदलता पर्यावरण ..

ENVIRONMENT, पर्यावरणENVIRONMENT, पर्यावरण

दोस्तो ..
जून के पहला सप्ताह हमें कुछ याद दिलाता है ,
क्या ??
कुछ ऐसा जिसे हम जानते हैं , जिसके बारे में बात करते है , कुछ विरले उसे बचाने के कोशिश करते हैं और ज्यादातर उसे तहस नहस करने पर तुले है ।


हम बात कर रहे हैं. “ पर्यावरण ” यानी “ ENVIRONMENT ” की ।


आइये सफर शुरू करते है –


5 जून 1974 से इसे मनाने की शुरुआत हुई थी , उद्देश्य था लोगों को पर्यावरण के संरक्षण हेतु जागरूक करना ।

क्या है पर्यावरण ??


पर्यावरण वह है जिसके बिना हमारा जीवन अकल्पनीय है । अपने आस – पास देखिए , आपको जो भी नजर आता है , वह पर्यावरण का हिस्सा है । अर्थात – वायु , मिट्टी , जल , पेड़ – पौधे एवं समस्त जीवधारी इन सबको मिलाकर जो इकाई बनती है वह पर्यावरण कहलाती है ।

क्यों उठती है पर्यावरण संरक्षण की बात ??


शायद पर्यावरण संरक्षण की बात कभी सर नही उठाती , अगर मनुष्य प्रकृति को वैसे ही स्वीकार कर लेता जैसी वह है ,और एक नए पर्यावरण का निर्माण न करता । जिसे हम मानव निर्मित पर्यावरण कह सकते है ।


क्या है मानव निर्मित पर्यावरण ??


मनुष्य को धरती का सबसे बुद्धिमान प्राणी कहा जाता है । जिसके प्रमाण उसने एक नही हज़ारों बार दिए हैं , अपनी जीवन शैली को बेहतर बनाने के लिए उसने कई अविश्वसनीय खोजें और आविष्कार किये । बगैर इस बात को ध्यान रखे कि इससे पर्यावरण को कितनी क्षति पहुंच सकती है ।


नजर डालते हैं सबसे महत्वपूर्ण बिंदु पर –

ओजोन परत


पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत ( LAYER ) , जिसके कारण धरती पर जीवन संभव है , क्यों कि यह सूर्य की हानिकारक ( HARMFUL ) , पराबैंगनी किरणों ( ultraviolet radiation ) को ऊपरी वायुमंडल में रोक लेती है , तथा पृथ्वी की सतह तक नही पहुंचने देती । यह पराबैंगनी विकिरण जो सभी जीव जंतुओं के लिए हानिकारक है , ओजोन गैस एक सुरक्षा चक्र की भांति हमारी रक्षा करती है । लेकिन 1985 में वैज्ञानिकों के एक समूह ने यह पता लगाया कि सबसे ठंडे महाद्वीप अंटार्कटिका ( antarctica continent ) के ऊपर ओज़ोन परत में एक बड़ा छिद्र हो गया है । जिसका विस्तार होता जा रहा है , इसके कारण ओज़ोन की मात्रा 25 से 30 प्रतिशत कम हो गयी है । सिर्फ इतना ही नही और भी कई जगहों पर छिद्र पाए गए है ।

क्यों हो रहा है इस सुरक्षा चक्र का क्षरण ??


सिर्फ और सिर्फ मानव ही वह कारण है जो पर्यावरण की वर्तमान अवस्था का जिम्मेदार है । वह अपने क्रिया – कलापो से अपनी और अपनी वाली पीढ़ी के लिए एक नई समस्या को जन्म दे रहा है । वह जाने – अनजाने ऐसे गैसों की मात्रा बढ़ाये जा रहा है जो ओज़ोन परत को धीरे – धीरे नष्ट कर रही है ।


कैसे ? ? ?


आइये जानते हैं –


【1】हम बहुत से ऐसे उपकरणों पर आश्रित हैं जो कि बिजली से चलते ( electronic ) हैं । और किसी न किसी प्रकार की गैस ( gas ) का रिसाव ( leak ) करते हैं । जैसे – रेफ्रिजरेटर , एयर कंडीशनर ( फ़्रियान – 11 , फ़्रियान – 12 ) आदि ।


【2】रोजाना इस्तेमाल होने वाले स्प्रे , जैसे – डिओड्रेंट , परफ्यूम आदि में CFC ( क्लोरो फ्लोरो कार्बन ) का प्रयोग होता है ।


【3】 पुराने वाहनों से निकलने वाले धुआं ऑक्सीजन नही वरन कार्बन डाइऑक्साइड , सल्फर डाइआक्साइड , नाइट्रोजन आक्साइड जैसा जहर उगलता है ।


【4】प्राकृतिक तरीकों की बजाय रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग फलों , सब्जियों , आदि के माध्यम से हमारे खाने को जहरीला बना रहा है , यह मिट्टी की उर्वरता तो कम करता ही है , साथ ही मिट्टी में रिसकर भूमिगत जल एवं अन्य बड़े जलस्त्रोत जैसे नदियों आदि को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित या दूषित करता है ।


【5】भवन निर्माण एवं कागज़ आदि के लिए वृक्षों का कटान मृदा अपरदन और असंतुलित मौसम चक्र का कारण बनता है ।

कारण और भी बहुत हो सकते हैं , महत्वपूर्ण है इनसे होने वाली हानियों पर गौर करना ।

क्या होगा अगर हम अब भी नही रुके ??


【1】तापमान में वृद्धि

【2】सभी जीव – जंतुओं के लिए हानिकारक और कैंसर का कारण

【3】त्वचा रोग , कैंसर , अल्सर , मोतियाबिंद रोग होने की संभावना में वृद्धि

【4】इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी ।

【5】गर्भस्थ शिशु को हानि ( मानसिक / शारिरिक )

हम प्रकृति की सुरक्षा एवं बचाव हेतु जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस तो मनाते है लेकिन इस के अतिरिक्त आप और हम क्या कर सकते हैं


◆ हमें जरूरत है अपने दिखावटी जीवन से बाहर आकर वास्तविकता को स्वीकार करने की और अपने लिए एक लक्ष्मण रेखा का निर्माण करने की ।
◆ हमें जरूरत है ये समझने की जीवन अनेकानेक सुविधाओं से लैस करने से पर्यावरण बचेगा या नही ।
◆ हमें जरूरत है रिसाइक्लिंग यानी पुनः उपयोग का गणित समझने की , आजकल हर चीज क्वालिटी के नाम पर पैक कर के बेची जा रही है , चाहे वह बिसलरी का पानी हो या मैकडोनाल्ड का बर्गर । इसमें हमें अपना फायदा तो नजर आता है , लेकिन वर्षो तक नष्ट न होने वाला प्लास्टिक और कूड़ा – कचरा हम बढ़ा रहे हैं उसे नजरअंदाज कर देते हैं
◆हमें जरूरत है यह बात समझने की पलायन को रोकना और गाँवों को बचाना क्यों महत्वपूर्ण है , साल दर साल गांव शहर में तब्दील हो रहे हैं । वनों का कटाव , अशुद्ध पानी , मृदा – अपरदन और चारों तरफ फैलता कचरा इसका मुख्य कारण है ।

और अंत मे …
प्रकृति बेहद खूबसूरत है , इतनी की हम कल्पना भी नही कर सकते । और हमारे कर्म इसे इतना बदसूरत बना सकते हैं की जितनी हम कल्पना भी नही कर सकते । अपने स्तर पर प्रकृति को बचाने के ईमानदारी भरे प्रयास कीजिये । जिससे कुदरत भी सुरक्षित रहे और हम अपना जीवन यापन भी बेहतर ढंग से कर सकें । अन्यथा प्राकृतिक संकट जब आते हैं तो अपने साथ कई और आपदाओं को भी ले आते हैं । सुनामी और केदारनाथ जैसे तूफ़ान और कोरोना जैसी महामारी इसके सिर्फ कुछ उदाहरणों में एक है ।

Written by
Prateek
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